E20 पेट्रोल पर भ्रम फैलाने वालों को सरकार का जवाब, वैज्ञानिक परीक्षणों और ऑटो कंपनियों के आंकड़ों से दावों का किया खंडन
नई दिल्ली, 30 जुलाई। एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में किए जा रहे दावों पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने विस्तृत तथ्य जारी करते हुए कहा है कि E20 कार्यक्रम पूरी तरह वैज्ञानिक परीक्षण, वास्तविक फील्ड अनुभव और ऑटोमोबाइल उद्योग के प्रमाणित आंकड़ों पर आधारित है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि E20 के कारण बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने, पुराने वाहनों के अनुपयोगी होने या माइलेज में भारी गिरावट जैसी आशंकाओं का कोई तकनीकी आधार नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार, E15+ पेट्रोल पिछले साढ़े तीन वर्षों से और E19-E20 पेट्रोल पिछले ढाई वर्षों से देशभर में उपयोग किया जा रहा है। इस दौरान 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से अधिक पेट्रोल कारें इन ईंधनों पर संचालित हुई हैं, लेकिन एथेनॉल मिश्रण के कारण व्यापक इंजन क्षति या वाहन खराब होने का कोई सत्यापित मामला सामने नहीं आया।
सरकार ने बताया कि भारत में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वर्ष 2001 में शुरू हुआ था और आवश्यक उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे तथा नियामकीय व्यवस्था विकसित करने के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया। वर्ष 2025-26 में औसत एथेनॉल मिश्रण 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
मंत्रालय ने कहा कि एक प्रमुख वाहन निर्माता द्वारा वित्त वर्ष 2025-26 में 2.84 करोड़ वाहनों के सर्विस रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, जिनमें लगभग 1.5 करोड़ ऐसे पुराने वाहन भी शामिल थे जो मूल रूप से E20 के लिए प्रमाणित नहीं थे। इसके बावजूद E20 के कारण जंग, असामान्य घिसावट या पुर्जों की आयु में कमी का कोई प्रमाण नहीं मिला। एक अन्य प्रमुख कंपनी ने 1.4 करोड़ E20 पर चलने वाले वाहनों के अध्ययन में भी इसी तरह के परिणाम दर्ज किए।
4 जुलाई 2026 को आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता का उल्लेख करते हुए मंत्रालय ने बताया कि टोयोटा किर्लोस्कर, मारुति सुजुकी, हीरो मोटोकॉर्प, हुंडई मोटर इंडिया, टीवीएस मोटर कंपनी और बजाज ऑटो के वरिष्ठ अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से E20 कार्यक्रम का समर्थन किया। कंपनियों ने कहा कि E20 को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कठोर परीक्षणों और व्यापक तकनीकी मूल्यांकन के बाद लागू किया गया है।
माइलेज को लेकर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ईंधन दक्षता कई कारकों पर निर्भर करती है। पुराने E10 आधारित वाहनों में माइलेज में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक का सीमित प्रभाव हो सकता है, लेकिन सोशल मीडिया पर प्रसारित बड़े दावे तथ्यात्मक नहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार, E20 ईंधन बेहतर ऑक्टेन, स्वच्छ दहन, बेहतर इंजन प्रदर्शन और स्मूद ड्राइविंग जैसे लाभ भी प्रदान करता है।
मंत्रालय ने यह भी कहा कि यदि E20 से वास्तव में व्यापक तकनीकी नुकसान होता तो वाहन निर्माता न तो E20 अनुकूल वाहनों को प्रमाणित करते और न ही उनकी वारंटी जारी रखते। सरकार के अनुसार, E20 कार्यक्रम वैज्ञानिक परीक्षणों, उद्योग के अनुभव, करोड़ों वाहनों के वास्तविक उपयोग और लगातार गुणवत्ता निगरानी के आधार पर संचालित किया जा रहा है तथा सोशल मीडिया पर प्रसारित कई दावे भ्रामक और तकनीकी प्रमाणों से रहित हैं।
