दिल्ली में कचरे से बनेगी स्वच्छ ऊर्जा: ऑयल इंडिया और एमसीडी के बीच 800 टन प्रतिदिन क्षमता वाले दो सीबीजी संयंत्रों के लिए ऐतिहासिक समझौता
Political Trust Magazine
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ शहर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल के तहत महारत्न केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रम ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) और दिल्ली नगर निगम (MCD) के बीच दो कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्रों की स्थापना के लिए एक ऐतिहासिक समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इन दोनों संयंत्रों की संयुक्त कचरा प्रसंस्करण क्षमता 800 टन प्रतिदिन (500 TPD + 300 TPD) होगी।
यह समझौता दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता तथा दिल्ली नगर निगम के महापौर प्रवेश वाही की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर ऑयल इंडिया लिमिटेड ने केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के निरंतर मार्गदर्शन, नेतृत्व और प्रोत्साहन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से स्वच्छ एवं ऊर्जा-सुरक्षित भारत के निर्माण का संकल्प लगातार मजबूत हो रहा है।
इस परियोजना के तहत पृथक किए गए जैविक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर प्रतिदिन 30 से 32 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) का उत्पादन किया जाएगा। यह स्वच्छ एवं हरित ईंधन लैंडफिल पर बढ़ते दबाव को कम करने, शहरी स्वच्छता को सुदृढ़ बनाने और देश की गैस-आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना केवल कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दिल्ली में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नई दिशा मिलेगी और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

ऑयल इंडिया लिमिटेड की यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन, SATAT (सस्टेनेबल अल्टरनेटिव टुवर्ड्स अफोर्डेबल ट्रांसपोर्टेशन), परिपत्र अर्थव्यवस्था (Circular Economy) और नेट ज़ीरो के विज़न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की सक्रिय भागीदारी देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सतत विकास की ओर अग्रसर करने में अहम भूमिका निभा रही है।
स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और कचरे से संसाधन निर्माण की यह पहल भविष्य के भारत के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में देखी जा रही है, जो विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करती है।http://Politicaltrust.in
