MC²+ ने लॉन्च किया ‘ग्रैंड ब्यूटेनॉल चैलेंज’, स्वदेशी बायोफ्यूल तकनीकों के लिए ₹12.5 करोड़ की सहायता

 MC²+ ने लॉन्च किया ‘ग्रैंड ब्यूटेनॉल चैलेंज’, स्वदेशी बायोफ्यूल तकनीकों के लिए ₹12.5 करोड़ की सहायता

15 अगस्त 2026 तक आवेदन आमंत्रित, TRL 4–7 स्तर की Bio-Iso-Butanol और n-Butanol तकनीकों को मिलेगा अनुदान, मेंटरशिप और व्यावसायीकरण का अवसर
मुंबई- भारत के ऊर्जा नवाचार मंच MC² Foundation ने बेंगलुरु में ‘ग्रैंड ब्यूटेनॉल चैलेंज’ की शुरुआत की है। इस राष्ट्रीय नवाचार कार्यक्रम का उद्देश्य Bio-Iso-Butanol और n-Butanol उत्पादन के लिए स्वदेशी, स्केलेबल और उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देना है। इस चुनौती के तहत कुल ₹12.5 करोड़ की पुरस्कार राशि और अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।
MC² Foundation, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (MoPNG) के अधीन कार्य करती है। इसे HPCL, ONGC, IOCL, BPCL, GAIL, ऑयल इंडिया लिमिटेड और पेट्रोनेट LNG लिमिटेड द्वारा संयुक्त रूप से प्रोत्साहित किया जाता है। कार्यक्रम के तकनीकी साझेदार CHT, जबकि DST और DBT इसके नॉलेज पार्टनर हैं। C-CAMP इस पहल का कार्यान्वयन और मेंटरशिप पार्टनर है।

यह चुनौती Technology Readiness Level (TRL) 4 से 7 तक की तकनीकों पर केंद्रित है। इसमें फर्मेंटेशन आधारित उत्पादन, कैटेलिटिक उत्पादन और अन्य नवाचारी ब्यूटेनॉल उत्पादन तकनीकों से जुड़े समाधान आमंत्रित किए गए हैं। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में गैर-खाद्य फीडस्टॉक से माइक्रोबियल उत्पादन, कम ऊर्जा वाली पृथक्करण तकनीक, बायो-आधारित सीटेन इम्प्रूवर और फील्ड-डिप्लॉयबल क्वालिटी कंट्रोल हार्डवेयर शामिल हैं।
चयनित नवाचारकर्ताओं को ₹7.5 करोड़ तक की ग्रांट, ₹5 करोड़ तक की पुरस्कार राशि, पायलट परियोजनाओं में भागीदारी, PSU भागीदारों के माध्यम से व्यावसायीकरण का अवसर और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलेगा। इस कार्यक्रम के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है।
लॉन्च कार्यक्रम में MC² Foundation के निदेशक एवं CEO संदीप माहेश्वरी ने कहा कि भारत के पास विश्वस्तरीय वैज्ञानिक प्रतिभा और अनुसंधान क्षमता है, लेकिन उद्योग, स्टार्टअप और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता थी। MC²+ इसी उद्देश्य से एक साझा मंच प्रदान कर रहा है, जिससे स्वदेशी ऊर्जा तकनीकों को तेजी से विकसित कर भारत की ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।
वहीं C-CAMP के निदेशक-CEO डॉ. तस्लीमारिफ सैयद ने कहा कि माइक्रोबियल इंजीनियरिंग और नई पीढ़ी की फर्मेंटेशन तकनीकों में हुई प्रगति के कारण यह बायोफ्यूल नवाचार के लिए बेहद उपयुक्त समय है। कार्यक्रम में डॉ. मधुकर ओंकारनाथ गर्ग ने भी बायोफ्यूल तकनीकों के विकास, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।http://Politicaltrust.in