फर्जी कृषि कॉलेजों पर लगेगी लगाम, जल्द बनेगी एग्रीकल्चर काउंसिल: शिवराज सिंह चौहान
एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन में कृषि शिक्षा, किसानों की आय और खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने पर दिया जोर
नई दिल्ली- केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में मानकों के बिना खुल रहे निजी कृषि कॉलेजों और फर्जी डिग्रियों पर रोक लगाने के लिए जल्द ही एग्रीकल्चर काउंसिल का गठन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने और उनकी डिग्रियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
शिवराज सिंह चौहान बुधवार को दिल्ली के पूसा में एग्रीविज़न के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल अपनी खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के लिए ‘फूड बास्केट’ बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। इसके लिए किसानों की आजीविका बेहतर बनाने, कृषि उत्पादन बढ़ाने और आधुनिक तकनीकों को खेती से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
10 वर्षों में 49 प्रतिशत बढ़ा खाद्यान्न उत्पादन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने कृषि क्षेत्र में लंबा सफर तय किया है। एक समय देश को खाद्यान्न के लिए आयात पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज भारतीय किसानों की मेहनत और कृषि क्षेत्र में हुए बदलावों के कारण देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच देश का कुल कृषि उत्पादन 49 प्रतिशत बढ़ा है। भारत चावल उत्पादन और निर्यात में दुनिया में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।

उन्होंने कहा कि अब चुनौती केवल उत्पादन बढ़ाने की नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भंडारण, बेहतर प्रबंधन और वैश्विक बाजारों तक भारतीय कृषि उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की भी है।
कृषि छात्रों की डिग्री बेकार नहीं जाने देंगे
कृषि शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर देते हुए चौहान ने कहा कि किसी भी संस्थान को केवल फीस लेकर डिग्री बांटने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बीएससी एग्रीकल्चर और एमएससी एग्रीकल्चर जैसी तकनीकी डिग्रियों का महत्व बनाए रखना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों की मेहनत और उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।
उन्होंने कृषि विशेषज्ञों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करें और व्यावहारिक सुझाव दें। उन्होंने कहा, “आप मंथन से अमृत निकालिए, हम उसे नीति बनाकर लागू करेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि अधिवेशन में आए सुझावों के आधार पर अगले 15 दिनों से एक महीने के भीतर प्रतिनिधियों के साथ दोबारा बैठक कर अल्पकालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजना पर चर्चा की जाएगी।
छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में औसत कृषि जोत लगभग 0.96 हेक्टेयर है। ऐसे में छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती में विविधीकरण आवश्यक है। किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ फल, सब्जियां, औषधीय पौधों की खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और प्राकृतिक खेती जैसे विकल्प अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे खेती को अधिक प्रभावी बनाने और किसानों की आजीविका को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
एग्रीविज़न की विशेष पुस्तिका का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने एग्रीविज़न के दस वर्षों के सफर पर आधारित विशेष पुस्तिका का विमोचन किया। अधिवेशन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रघुराज किशोर तिवारी, एग्रीविज़न के अखिल भारतीय प्रमुख विक्रम सिंह, राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री एस. बालकृष्ण, क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही, आयोजन सचिव मनीष फाटे और राष्ट्रीय संयोजक सनथ कुमार सहित देशभर से आए कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।http://Politicaltrust.in
