सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए पूरी दिल्ली छावनी में तब्दील, लेकिन प्रदर्शनकारी नजर नहीं आए

 सीजेपी के प्रदर्शन को देखते हुए पूरी दिल्ली छावनी में तब्दील, लेकिन प्रदर्शनकारी नजर नहीं आए

Nimmi Thakur 

New Delhi –सीजेपी के प्रोटेस्ट को देखते हुए आज पूरी दिल्ली, खासकर नई दिल्ली इलाका छावनी में तब्दील था। सत्तावन मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए थे, ट्रेनों को रद्द कर दिया गया था और उम्मीद थी कि भीड़ नहीं जुटेगी और हुआ भी ऐसा ही।

पुलिस की इतनी बड़ी तैनाती, सैनिकों की इतनी बड़ी तैनाती, जगह-जगह फोर्स, जगह-जगह फोर्स की गाड़ियां, बसें, जिनमें भरकर पुलिस वाले आए थे, चारों तरफ लगे थे, बैरिकेड्स लगे थे। पार्लियामेंट के आसपास, मंत्रालय के आसपास पूरी तरह से बैरिकेड्स थे। कोई कहीं दिख नहीं रहा था।

इसी बीच कुछ छात्र संगठन, एनएसयूआई के और कुछ प्रदर्शनकारी जैसे-तैसे वहां पहुंच गए थे और इससे पहले कि वो कुछ उत्पात मचा पाते या हल्ला कर पाते या कुछ मोर्चा बनाकर मूव करते, उससे पहले पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया और मेरी नजरों के सामने से तीन बसों में उन्हें भरकर आकाशवाणी भवन के पास से ले गए। वहां पर पीटीआई के सामने, आकाशवाणी भवन के बीच में वो लोग प्रदर्शन कर रहे थे और बसों को रोक दिया गया था वहां पर। जब बसें रुक गईं तो जायज सी बात है कि वहां पर आने-जाने का कोई रास्ता बचा नहीं था। मीडिया वालों का प्रवेश भी बहुत मुश्किल से हो रहा था।

गूगल मैप के जरिए हम बारापुला रोड, बंदा बहादुर फ्लाईओवर होते हुए लोधी कॉलोनी से घूमते-घामते, किसी तरह से मदर टेरेसा क्रेसेंट होते हुए शांति पथ होते हुए हम राष्ट्रपति भवन के पिछले हिस्से से जब वहां पहुंचे तो हमें रोक दिया गया। लेकिन वहां पर पुलिस को आईडी कार्ड दिखाने के बाद और रिक्वेस्ट करने के बाद उन्होंने आगे जाने दी हमारी गाड़ी।
हम जंतर-मंतर की तरफ रिजर्व बैंक के होते हुए पटेल चौक मेट्रो स्टेशन होते हुए जंतर-मंतर की तरफ पहुंचे तो वहां सिर्फ पुलिस वाले ही पुलिस वाले खड़े थे, सुरक्षा वालों के जवान खड़े थे और मीडिया के लोग बैठे हुए थे। बहुत सारे मीडिया के लोग, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोग, प्रिंट मीडिया के लोग, लेकिन एकदम शांति का माहौल था।

पुलिस वाले जो एक-दो लोग आ रहे थे, उन्हें पूछ भी नहीं रहे थे, रोक भी नहीं रहे थे कि कहां जा रहे हैं, ये भी नहीं। कुछ दुकानें वापस आसपास खुली हुई थीं, जिसमें चाय, पानी, समोसे, नाश्ता, पानी, इस तरह की कोल्ड ड्रिंक्स की व्यवस्था थी। वहां पर रहने के बाद फिर और जगह देखा गया तो कहीं पर कोई भीड़ नजर नहीं आई।

इस बीच में ये खबर आती रही कि एम्स के पास योगेंद्र यादव, शांति भूषण, प्रशांत भूषण ये लोग निकल रहे हैं, जिन्हें अरेस्ट किया गया और हिरासत में लिया गया।

और उसके कुछ देर के बाद ही डेरेक ओ’ब्रायन, जो टीएमसी के नेता हैं, उन्होंने ट्वीट किया और ट्वीट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें ममता बनर्जी और टीएमसी के चार सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया हुआ है, गाड़ी में बिठाया हुआ है। और डेरेक ने यह दावा किया कि लगभग दो घंटे से गाड़ी में ममता दीदी को घुमाया जा रहा है। कहां से कहां ले जा रहे हैं, यह पता नहीं।

कुछ मीडिया वाले भी जो आने की कोशिश कर रहे थे, जहां बैरिकेड्स लगे हुए थे, तो ऐसी खबर आई है कि उन्हें भी प्रदर्शनकारी समझकर हिरासत में लिया गया और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में जाकर के उन्हें छोड़ दिया गया। बड़ी मुश्किल से संपर्क उनसे घरवालों की हो पा रही है अब वो छोड़ा जाएगा या क्या, वो बाद की बात है।

लेकिन कुल मिलाकर प्रदर्शन की बात करें तो प्रदर्शन बिल्कुल नहीं था। ऐसा लग रहा था कि कुछ बहुत बड़ा होने वाला है और जिसके लिए पुलिस ने पूरा ट्रैफिक रोक रखा था और किसी की एंट्री वहां पर बहुत मुश्किल थी। पूरी दिल्ली किले में तब्दील या युद्ध का मैदान जैसी दिखी

इस बीच में भारतीय जनता पार्टी की तरफ से दो प्रेस कॉन्फ्रेंस की सूचना आई। चार बजे रविशंकर प्रसाद की प्रेस कॉन्फ्रेंस थी। इसी बीच तरह-तरह की खबरें भी आती रहीं। खबरें यह आती रहीं कि भाजपा ने डाइवर्ट करने के लिए भी एक रणनीति अपनाई। जेएनयू में एक प्रोफेसर ने महिला के साथ उत्पीड़न, कार्यकर्ता का मामला, उसको लेकर के प्रेस कॉन्फ्रेंस वहां पर किया गया।

उधर दीपके को फ्लाइट में ही अरेस्ट कर लिया गया था, हिरासत में लिया गया था। उनके साथियों को भी हिरासत में लिया गया था। और इसी बीच ये खबर आई कि दीपके की दादी मां का स्वर्गवास हो गया है,
वो हिंगोली, महाराष्ट्र में उनकी दादी रहती थी, जैसी सूचना आई है।

तो कुल मिलाकर के आज कहीं कुछ बड़ी घटना नहीं रही। शांतिपूर्ण तरीके से किया गया, लेकिन सबसे जो आश्चर्यजनक बात और दिलचस्प बात निकलकर आई कि पुलिस वाले आपस मे बातचीत में यह चर्चा करते हुए दिख रहे थे कि

आज तो यह रुक गया, लेकिन अगर कल वो फिर निकल के आते हैं, चार दिन के बाद फिर निकल के आते हैं, दस दिन के बाद फिर निकल के आते हैं, तो इस तरह के हालात आखिर कब तक करते रहेंगे?

इन सब के बीच जो सबसे बड़ी अभी नजर है, वो चेन्नई में राहुल गांधी की छात्रों की गूंज कार्यक्रम की है। वहां से वो किस तरह का संबोधन करते हैं, राहुल गांधी, यह देखने वाली बात है, क्योंकि वो एक दिशा तय करेगा।

इसमें राजनीतिक पार्टी के कोई भी कार्यकर्ता या कोई भी नेता, सब अलग-अलग जगह पर गिरफ्तार हुए हैं। सिर्फ ममता बनर्जी दिल्ली में हैं। बाकी कोई कांग्रेस का कोई बड़ा नेता या समाजवादी पार्टी का कोई बड़ा नेता अगर निकल करके आता, कोशिश करता, तो पता नहीं उन लोगों ने क्यों नहीं किया।

हो सकता है कहीं यह सोच हो कि चूंकि यह छात्रों का आंदोलन है, छात्रों के नाम पर आंदोलन है, अगर लीडरशिप से जुड़ गया तो शायद वो डिरेल हो सकता है, जो इश्यूज हैं वो डिरेल हो सकते हैं। इसलिए शायद राजनीतिक पार्टियों ने दूरी रखी हुई है।

एक सूचना जो कांग्रेस के सूत्रों के हवाले से आई है, अब उसकी पुष्टि भी हो जाएगी जब राहुल गांधी संबोधित करेंगे कि शायद राहुल गांधी वहां पर चेन्नई में अपने भाषण में छात्रों के कार्यक्रम में कहें कि यह आपका आंदोलन है, आप नेतृत्व कर रहे हैं, आप मतलब छात्र इसका नेतृत्व कर रहे हैं और हम सब आपके साथ हैं।

तो यह शायद एक छात्रों के आंदोलन के रूप में स्थापित हो जाएगा और इतिहास गवाह है, जब भी छात्र के आंदोलन हुए हैं, सत्ता बदल गई है। चाहे वो कांग्रेस की सत्ता रही हो, चाहे वो गैर-कांग्रेसी सत्ता रही हो, छात्र के आंदोलन को कोई आज तक संभाल नहीं पाया। और विपक्षी पार्टियां शायद ही कोशिश में हैं कि छात्रों का आंदोलन है और चलता रहे।

लेकिन जो अच्छी बात आई, शांतिपूर्ण रहा। लेकिन इसे आप प्रदर्शन नहीं कह सकते। शांतिपूर्ण प्रदर्शन हुआ है, यह बिल्कुल नहीं कह सकते। पुलिस ने प्रदर्शन होने ही नहीं दिया।

तो कुल मिलाकर कहा जाए कि प्रदर्शन को रोकना कितना सफल रहा, तो मुझे लगता है कि प्रदर्शन को रोकना सौ में सौ फीसदी सफल रहा। लेकिन बड़ा सवाल अगर राजनीतिक के लिहाज से या लोकतंत्र के लिहाज से पूछा जाए तो कोई भी प्रदर्शन इतनी पुलिस बल तैनात करके आप रोक देंगे,तो बहुत दिक्कत है।

तो मुझे वो दृश्य याद आता है जब आप लोग भी जब कश्मीर गए हुए हों, अनुच्छेद 370 हटने से पहले या उसके बाद के कुछ सालों में भी अगर गए हैं, तो वहां जिस तरह से पुलिस बल की तैनाती होती है, चप्पे-चप्पे पर, उसी तरह नई दिल्ली, लुटियंस जोन में खास करके पुलिस की तैनाती उसी तरह की थी।

लेकिन सरकार के लिए एक सोचने का विषय है और शायद सरकार उस पर सोच भी रही है कि ये इतना आसानी से कोई कन्फ्रंट किए बिना प्रदर्शन में नहीं आना, शामिल नहीं होना, यह साधारण बात नहीं है। यह तूफान से पहले की शांति है। सरकार इस दिशा में सोच रही है और इसमें कोई शक नहीं कि आने वाले दिनों में कोई बड़ा प्रदर्शन देखने को मिले।http://Politicaltrust.in