बापू हम सब से पूछ रहे- संजीव जैन
लेखक -संजीव जैन
लाठी, गोली और दमन से,
सत्ता को परहेज़ कहाँ।
तब अग्रजों का भारत था,
अब भारत के अंग्रेज़ यहाँ।
बापू की तस्वीरों पर,
बस फूल चढ़ाए जाते हैं।
लेकिन नीति के आँगन में,
सिद्धांत भुलाए जाते हैं।
शोषण, हिंसा और विभेद ही,
सत्ता का संदेश यहाँ।
तब अग्रजों का भारत था,
अब भारत के अंग्रेज़ यहाँ।
हिंसक हड़तालें रोज़-रोज़,
सड़कों पर दिखाई देती हैं।
करुण कहानी जनता की,
हर ओर सुनाई देती है।
बापू हम सब से पूछ रहे,
वो आज़ादी का स्वप्न कहाँ?
तब अग्रजों का भारत था,
अब भारत के अंग्रेज़ यहाँ।
