कुछ ख़्वाब, कुछ यादें, कुछ रिश्ते—और इन्हीं से ख़ूबसूरत है ज़िंदगी।” ——————— ज़िंदगी जश्न है कश्मकश में भी… संजीव जैन
लेखक -संजीव जैन
मेरी दुआओं में आप शामिल हैं,
मेरी सदाओं में आप शामिल हैं।
कि ज़िंदगी ख़ूबसूरत लगती है,
इन फ़िज़ाओं में आप शामिल हैं।
इससे ज़्यादा जुनून क्या होगा,
दिल का सुकून और क्या होगा।
जो ख़त तुमने लिखे ही नहीं,
दिल जानता है मज़मून क्या होगा।
हर फ़रियाद याद है मुझको,
वक़्त के जवाब याद हैं मुझको।
सुबह होती है, नींद खुलती है,
रात के ख़्वाब याद हैं मुझको।
हर सुबह आकर जब जगाती है,
कान में हवाएँ बता के जाती हैं-
मैं भी किसी की दुआ में शामिल हूँ,
ज़िंदगी उम्मीद जगा के जाती है।
दोस्ती का कमाल ये भी है,
ज़िंदगी का मासूम सवाल ये भी है।
ज़िंदगी जश्न है कश्मकश में भी,
इस ज़माने में मिसाल ये भी है।
