लद्दाख माउंटेन मैराथन-2026″ में उत्तराखंड के चिराग उप्रेती ने जीता कांस्य पदक

 लद्दाख माउंटेन मैराथन-2026″ में उत्तराखंड के चिराग उप्रेती ने जीता कांस्य पदक

सी एम पपनै

लेह-लद्दाख। लद्दाख की दुर्गम पहाड़ियों में आयोजित होने वाली व 13वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी प्रतिष्ठित चुनौती पूर्ण 42.195 किलोमीटर “लद्दाख माउंटेन मैराथन-2026” के 40 से 50 आयु वर्ग में विगत 13 सितंबर को अल्मोड़ा जिला धौलादेवी क्षेत्र के गांव खेती निवासी चिराग उप्रेती द्वारा 4 घंटे 17 मिनट में उक्त दौड़ पूरी कर कांस्य पदक हासिल कर उत्तराखंड का नाम रोशन किया है।

“लद्दाख माउंटेन मैराथन” देश की कठिन ऊंचाई वाली मैराथन में शामिल है। लेह से शुरू होने वाली इस चुनौतीपूर्ण दौड़ का मार्ग दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल दर्रों में शामिल खारदुंगला पास की ओर जाता है। मार्ग की ऊंचाई करीब 11,500 फीट तक पहुंचती है। 42.195 किलोमीटर के सफर में प्रतिभागियों को करीब 6000 फीट की चढ़ाई का सामना भी करना पड़ता है। अत्यधिक ऊंचाई वाले इस क्षेत्र में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के कारण धावकों के लिए आयोजित दौड़ शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता की भी परीक्षा लेती नजर आती है।

बहुत ज़्यादा ऊंचाई पर आयोजित होने वाली लद्दाख मैराथन को सबसे मुश्किल रोड मैराथन में से एक माना जाता है। आयोजित दौड़ में देश के विभिन्न राज्यों के धावकों के साथ-साथ दुनिया के अनेकों देशों के प्रतिभागियों द्वारा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, अत्यधिक ऊंचाई, ठंड और ऑक्सीजन की कमी के बीच आयोजित मैराथन में प्रतिभाग किया गया। आयोजित मैराथन को धावकों द्वारा पूरा करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है। 42.195 किलोमीटर की आयोजित यह रेस लेह और उसके आस-पास समुद्र तल से लगभग 3,500 मीटर (या 11,500 फीट) की ऊंचाई पर आयाेजित होती है।

उक्त दौड़ में धावक जब 35 किलोमीटर से ज़्यादा भाग चुके होते हैं तो रास्ता लेह की ओर ऊपर की तरफ़ चढ़ने लगता है। आखिरी छह किलोमीटर का रास्ता ज़्यादातर चढ़ाई वाला होता है। आखिरी तीन-चार किलोमीटर तो और भी अत्यधिक मुश्किल वाले हो जाते हैं क्योंकि धावक फ़िनिश लाइन के करीब पहुंच रहे होते हैं। उस समय तक धावक पहले ही लगभग 38 से 39 किलोमीटर दौड़ चुके होते हैं और वह भी ज़्यादा ऊंचाई पर। दौड़ की शुरुआत में जो चढ़ाई इस मैराथन में आसान लगती है, वह थकान और ऑक्सीजन की कमी के कारण बाद में बहुत मुश्किल हो जाती है। आयोजित मैराथन में धावकों को लद्दाख के पहाड़ों, सिंधु घाटी और अंचल के अनोखे मठों और बस्तियों से घिरे ऐसे नज़ारे देखने को मिलते हैं जो अन्य आम मैराथन दौड़ो से बिल्कुल अलग होते हैं।

उत्तराखंड के नैनीताल में जन्मे और पले-बढ़े तथा अपनी स्कूली शिक्षा शेरवुड कॉलेज, नैनीताल से पूरी करने वाले चिराग उप्रेती वर्तमान में न्यूयॉर्क मेडिकल कॉलेज में सेवारत हैं। पेशेवर जीवन के साथ उन्हें फोटोग्राफी और रेस में भाग लेने का विशेष शौक है। उक्त रुचि के चलते उन्होंने पहली बार न्यूयॉर्क से भारत पहुंचकर सीधे इस चुनौतीपूर्ण प्रतियोगिता “लद्दाख माउंटेन मैराथन-2026” में विशेष रूप में प्रतिभाग करने का निर्णय लिया, पहली ही भागीदारी में अपने आयु वर्ग में कांस्य पदक हासिल करने का सौभाग्य प्राप्त किया।

चिराग़ उप्रेती अंचल व देश के जैविक उत्पादों के क्षेत्र से जुड़े हुए व ‘दीर्घायु ऑर्गेनिक’ के संस्थापक ख्यातिरत उद्यमी तारा चंद्र उप्रेती के पुत्र हैं। चिराग उप्रेती की सफलता पर उनके परिजनों का कहना है, उक्त उपलब्धि से उत्तराखंड की खेल प्रतिभाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।http://Politicaltrust.in