वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर दिख रहा असर,तेल की कीमतों में तेज उछाल

 वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर दिख रहा असर,तेल की कीमतों में तेज उछाल

मुंबई। ईरान युद्ध को समाप्त करने की कूटनीतिक वार्ताओं में आई रुकावट का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने से कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर से तेज उछाल आया है, जिसके कारण मंगलवार को प्रमुख एशियाई शेयर बाजारों में सुस्ती और गिरावट का रुख देखने को मिला। यह स्थिति उन देशों के लिए विशेष चिंता का विषय है जो ऊर्जा के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर हैं।

युद्ध विराम की अस्थिर स्थिति के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद है, जो एशिया (विशेषकर जापान) में तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है। आपूर्ति बाधित होने की इन चिंताओं ने ऊर्जा बाजार को फिर से गरमा दिया है।

आंकड़ों के अनुसार, जून डिलीवरी वाले ब्रेंट क्रूड का भाव 1.11 डॉलर बढ़कर 109.34 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इसी तरह जुलाई अनुबंध वाला ब्रेंट क्रूड भी 1.08 डॉलर की बढ़त के साथ 102.77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। गौर करने वाली बात यह है कि युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था, जो संघर्ष के दौरान 120 डॉलर तक भी जा चुका है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड 96 सेंट चढ़कर 97.33 डॉलर प्रति बैरल हो गया है।

एशियाई बाजारों का हाल और बैंक ऑफ जापान का रुख

महंगे तेल के इस दबाव के कारण एशियाई शेयर बाजारों में व्यापक रूप से नकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली है। ऊर्जा आयात पर अत्यधिक निर्भर जापान का निक्केई 225 सूचकांक 1.1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,884.12 पर आ गया। हांगकांग का हैंग सेंग 0.7 प्रतिशत गिरकर 25,751.04 पर और शंघाई कंपोजिट 0.2 प्रतिशत टूटकर 4,078.77 पर बंद हुआ। ऑस्ट्रेलिया के S&P/ASX 200 में भी 0.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ 6,683.10 पर पहुंच गया।