भारत और न्यूजीलैंड एफटीए बनेगा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक सहयोग के लिए गेम-चेंजर
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- April 29, 2026
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नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) अंतिम रूप ले चुका है। दोनों देशों की सरकारों ने इसे द्विपक्षीय संबंधों में ऐतिहासिक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक सहयोग के लिए गेम-चेंजर करार दिया है। यह समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब भारत वैश्विक व्यापार नेटवर्क में अपनी पकड़ तेजी से मजबूत कर रहा है और न्यूजीलैंड नए बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि यह समझौता उनके देश के लिए पीढ़ी बाद मिलने वाला अवसर है। उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बताते हुए कहा कि करीब 1.5 अरब की आबादी तेजी से मध्यम वर्ग में बदल रही है और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों व सेवाओं की मांग बढ़ रही है। उनके मुताबिक, यह रुझान न्यूजीलैंड के कृषि, डेयरी, शिक्षा और सेवा क्षेत्रों के लिए बड़े अवसर पैदा करेगा। लक्सन ने यह भी रेखांकित किया कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में यह समझौता न्यूजीलैंड को भारत की आर्थिक वृद्धि के साथ जुड़ने और लंबे समय तक लाभ उठाने का मौका देगा।
लक्सन ने यह भी रेखांकित किया कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। ऐसे में यह समझौता न्यूजीलैंड को भारत की आर्थिक वृद्धि के साथ जुड़ने और लंबे समय तक लाभ उठाने का मौका देगा।
टैरिफ में बड़ी राहत, निर्यातकों को फायदा
एफटीए के तहत न्यूजीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत निर्यात में से 57 प्रतिशत उत्पादों को पहले ही दिन से टैरिफ से छूट मिल जाएगी। समझौते की अवधि के दौरान यह दायरा और बढ़ेगा, जिससे निर्यात लागत घटेगी और न्यूजीलैंड के उत्पाद भारतीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन और निवेश प्रवाह में भी सुधार की उम्मीद है।
टैरिफ में बड़ी राहत, निर्यातकों को फायदा
एफटीए के तहत न्यूजीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत निर्यात में से 57 प्रतिशत उत्पादों को पहले ही दिन से टैरिफ से छूट मिल जाएगी। समझौते की अवधि के दौरान यह दायरा और बढ़ेगा, जिससे निर्यात लागत घटेगी और न्यूजीलैंड के उत्पाद भारतीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन और निवेश प्रवाह में भी सुधार की उम्मीद है।
