सुप्रीम कोर्ट ने जातिगत जनगणना की याचिका को सुनने से किया इनकार, याचिकाकर्ता को फटकार
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- April 11, 2026
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सीजेआई सूर्यकांत ने एक याचिककर्ता को कड़े शब्दों में फटकार लगा दी। सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार को जाति जनगणना रोकने, संसाधनों के पुनर्वितरण को जनसंख्या उत्तरदायित्व से जोड़ने और एक बच्चे वाले परिवारों को आर्थिक प्रोत्साहन प्रदान करने वाली नीतियां बनाने का निर्देश देने वाली याचिका लगाई गई थी।सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से कहा, ”आप इस याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा कहां से सीखते हैं? ये बदतमीजी की भाषा कहां से लेकर आते हैं आप लोग? आप लोग याचिका कैसे लिखते हैं?”अदालत ने जनहित याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा के लिए याचिकाकर्ता की आलोचना की। सीजेआई सूर्यकांत ने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए याचिकाकर्ता से कहा, “आपने अपनी याचिका में बदतमीजी की भाषा लिखी है। आपने अपनी याचिका में अभद्र भाषा लिखी है। आपकी याचिका किसने लिखी है?”
जाति जनगणना के खिलाफ पहले भी खारिज हो चुकी है याचिका
इससे पहले दो फरवरी को शीर्ष अदालत ने 2027 की आम जनगणना में नागरिकों के जातिगत आंकड़ों को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली एक अलग जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।
इससे पहले दो फरवरी को शीर्ष अदालत ने 2027 की आम जनगणना में नागरिकों के जातिगत आंकड़ों को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली एक अलग जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था।
