पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते भारत की वास्तवित जीडीपी वृद्ध में एक फीसदी की कमी!

 पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते भारत की वास्तवित जीडीपी वृद्ध में एक फीसदी की कमी!
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया संघर्ष के आगामी वित्त वर्ष तक जारी रहने पर भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर में करीब एक फीसदी  तक कमी आ सकती है, जबकि खुदरा महंगाई में लगभग 1.5 फीसदी  बढ़त हो सकती है।इकोनॉमी वॉच रिपोर्ट के अनुसार कपड़ा, पेंट, रसायन, उर्वरक, सीमेंट व टायर जैसे कई क्षेत्र सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। इन क्षेत्रों में रोजगार या आय में किसी भी कमी से मांग पर और दबाव पड़ सकता है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 90 फीसदी आयात करता है, इसलिए वह ऐसे बाहरी झटकों के प्रति अधिक संवेदनशील है।
फरवरी की अपनी रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वृद्धि 6.8 से 7.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।  इससे पहले आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन ने अनुमान लगाया था, भारत की जीडीपी वृद्धि घटकर 6.1 फीसदी  रह सकती है।
बढ़ सकती है मंहगाई
रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि खुदरा महंगाई लगभग 1.5 फीसदी  बढ़कर अपने मूल अनुमान सात फीसदी  से ऊपर जा सकती है। इसकी वजह है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और आपूर्ति का संकट। युद्ध ने कच्चे तेल और ऊर्जा बाजारों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इससे तेल की घरेलू आपूर्ति और भंडारण पर असर पड़ा है। संघर्ष जल्दी समाप्त हो जाने पर भी देश में स्थिति सामान्य होने में कुछ महीनों का समय लग सकता है।