नए वित्त वर्ष में बदल गए शेयर बाजार के नियम, जाने बदलाव का क्या होगा असर
- कारोबार राष्ट्रीय
Political Trust
- April 1, 2026
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मुंबई। आज एक अप्रैल, 2026 से नया वित्त वर्ष शुरू हो गया है। इसी के साथ शेयर बाजार में कई नियम बदले हैं, जिनका असर कारोबारियों और म्यूचुअल फंड निवेशकों पर भी पड़ेगा। सबसे बड़ा बदलाव वायदा और विकल्प खंड यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस में देखने को मिलेगा, जहां टैक्स और मार्जिन दोनों सख्त किए गए हैं। इसके अलावा म्यूचुअल फंड और शेयर बायबैक से जुड़े नियम भी बदले हैं। नए नियम बाजार को ज्यादा सुरक्षित और संतुलित बनाने के लिए लाए गए हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित वायदा और विकल्प कारोबार पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) में बढ़ोतरी एक अप्रैल, 2026 से लागू होगी। सरकार ने वायदा अनुबधों पर एसटीटी को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया है, जबकि विकल्प प्रीमियम और विकल्प पर प्रतिभूति लेनदेन कर मौजूदा 0.1 फीसदी और 0.125 फीसदी से बढ़कर 0.15 प्रतिशत हो जाएगा। इस कदम का मकसद खुदरा निवेशकों के बीच अत्यधिक सट्टेबाजी पर रोक लगाना है।
बाजार विश्लेषकों ने कहा, एसटीटी में बढ़ोतरी का असर कम अवधि के लिए ही दिखेगा। इससे लंबे समय के कारोबारी व्यवहार पर कोई खास असर पड़ने की संभावना नहीं है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के विनय रजानी ने कहा कि एसटीटी में बढ़ोतरी से खुदरा निवेशकों के लिए ट्रेडिंग की लागत सीधे तौर पर बढ़ जाएगी, जिससे उनके मार्जिन और भी कम हो जाएंगे।
