निजी चार्टर उड़ानों के लिए सख्त होंगे DGCA के नियम? जाने पूरा मामला
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- February 7, 2026
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नई दिल्ली। राकांपा अध्यक्ष और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बिजनेस जेट 28 जनवरी को बारामती हवाई अड्डे के पास हादसे का शिकार हो गया था। जिसमें अजित पवार सहित कई लोगों की जान चली गई थी।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की हवाई दुर्घटना में मृत्यु के बाद देश में निजी स्वामित्व वाली विमानन सेवाओं के नए सिरे से निरीक्षण की जरूरत महसूस की जा रही है। निजी सेवाओं के दायरे में चार्टर हवाई जहाज, हेलीकॉप्टर और हॉटएयर बैलून आते हैं।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) के अनुसार 2014 से अब तक देश में 90 दुर्घटनाएं हुई हैं। वर्ष 2014-20 के दौरान हुई 56 दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा 39.3 प्रतिशत गैर-अनुसूचित विमानों के साथ हुईं, जबकि प्रशिक्षण संस्थानों के विमानों की हिस्सेदारी 28.6 प्रतिशत और शेड्यूल्ड ऑपरेटरों का हिस्सा 23.2 प्रतिशत था। वर्ष 2021 और 2024 के बीच 34 दुर्घटनाओं में 32.3 प्रतिशत गैर-अनुसूचित विमानों के साथ हुईं। इसमें डीजीसीए ने ‘दुर्घटना’ को मृत्यु, गंभीर चोट, विमान को भारी नुकसान या उसके लापता होने से जुड़ी घटनाओं के रूप में परिभाषित किया है।
डीजीसीए के रिकॉर्ड के अनुसार वर्तमान में देश में इस तरह के 445 विमान सेवा में हैं। इनमें से 214 फिक्स्ड-विंग, 220 रोटरी-विंग और 11 हॉट एयर बैलून हैं। फिक्स्ड-विंग ऑपरेटर बिजनेस जेट और छोटे यात्री या कार्गो विमान प्रदान करते हैं, जबकि रोटरी-विंग ऑपरेटरों को हेलीकॉप्टर संचालित करने के लिए अधिकृत किया गया है। कुल बेड़े में से तीन कार्गो सेवाएं देते हैं और 24 का उपयोग भूमि सर्वेक्षण जैसे हवाई कार्यों के लिए किया जाता है।
इस बीच, ऑपरेटरों की संख्या 133 हो गई है, जो 2015 की तुलना में सात अधिक है। लेकिन, विमानों और हेलीकॉप्टरों की कुल संख्या में 41 की वृद्धि हुई है। हालांकि ऑपरेटरों की संख्या 2022 में घटकर 91 रह गई थी। ये विमान विमान नियम, 1937 के नियम 134ए के उप-नियम (2) के तहत नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर परमिट के तहत उड़ान भरते हैं, जिसमें प्रावधान है कि शेड्यूल्ड सेवा को छोड़कर कोई भी हवाई परिवहन सेवा केंद्र सरकार की अनुमति के बिना संचालित नहीं की जा सकती।
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) के अनुसार 2014 से अब तक देश में 90 दुर्घटनाएं हुई हैं। वर्ष 2014-20 के दौरान हुई 56 दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा 39.3 प्रतिशत गैर-अनुसूचित विमानों के साथ हुईं, जबकि प्रशिक्षण संस्थानों के विमानों की हिस्सेदारी 28.6 प्रतिशत और शेड्यूल्ड ऑपरेटरों का हिस्सा 23.2 प्रतिशत था। वर्ष 2021 और 2024 के बीच 34 दुर्घटनाओं में 32.3 प्रतिशत गैर-अनुसूचित विमानों के साथ हुईं। इसमें डीजीसीए ने ‘दुर्घटना’ को मृत्यु, गंभीर चोट, विमान को भारी नुकसान या उसके लापता होने से जुड़ी घटनाओं के रूप में परिभाषित किया है।
डीजीसीए के रिकॉर्ड के अनुसार वर्तमान में देश में इस तरह के 445 विमान सेवा में हैं। इनमें से 214 फिक्स्ड-विंग, 220 रोटरी-विंग और 11 हॉट एयर बैलून हैं। फिक्स्ड-विंग ऑपरेटर बिजनेस जेट और छोटे यात्री या कार्गो विमान प्रदान करते हैं, जबकि रोटरी-विंग ऑपरेटरों को हेलीकॉप्टर संचालित करने के लिए अधिकृत किया गया है। कुल बेड़े में से तीन कार्गो सेवाएं देते हैं और 24 का उपयोग भूमि सर्वेक्षण जैसे हवाई कार्यों के लिए किया जाता है।
इस बीच, ऑपरेटरों की संख्या 133 हो गई है, जो 2015 की तुलना में सात अधिक है। लेकिन, विमानों और हेलीकॉप्टरों की कुल संख्या में 41 की वृद्धि हुई है। हालांकि ऑपरेटरों की संख्या 2022 में घटकर 91 रह गई थी। ये विमान विमान नियम, 1937 के नियम 134ए के उप-नियम (2) के तहत नॉन-शेड्यूल्ड ऑपरेटर परमिट के तहत उड़ान भरते हैं, जिसमें प्रावधान है कि शेड्यूल्ड सेवा को छोड़कर कोई भी हवाई परिवहन सेवा केंद्र सरकार की अनुमति के बिना संचालित नहीं की जा सकती।
