भारत रंग महोत्सव 2026 में मैथिली नाटक ‘सोन मछरिया’ का भावपूर्ण मंचन
नई दिल्ली। भारत रंग महोत्सव 2026 के अवसर पर मंडी हाउस स्थित मेघदूत सभागार में मिथिलांगन, दिल्ली द्वारा वरिष्ठ पत्रकार विकास कुमार झा द्वारा लिखित एवं संजय चौधरी द्वारा निर्देशित मैथिली नाटक ‘सोन मछरिया’ का सफल मंचन किया गया। नाटक ने दर्शकों के मन को गहराई से छू लिया और अंत तक सभागार तालियों की गूंज से भरता रहा।

नाटक की कथा दरभंगा स्थित मछली बाजार ‘दोनईर’ की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसमें मल्लाह समाज में जन्मी तेतरी के सामाजिक शोषण और संघर्ष को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। दबंग जमींदार के अत्याचार और तत्कालीन सामाजिक विसंगतियों के बीच मल्लाह समाज को उबारने का प्रयास जनसेवक के माध्यम से दिखाया गया है। तेतरी का प्रेम, उसका संघर्ष और अंत में पति से पुनर्मिलन का भावनात्मक दृश्य दर्शकों को भावविभोर कर गया।

नाटक के संगीत पक्ष तथा सभी कलाकारों के सशक्त अभिनय की दर्शकों ने लगातार तालियों से सराहना की। विशेष रूप से अभिनय कर रही नीरा झा ने अपने प्रभावशाली मंचन से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने अपनी भूमिका को अत्यंत तन्मयता से निभाया और उनकी संवाद अदायगी ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। उनकी अभिव्यक्ति और अभिनय कौशल को नाट्य कला के क्षेत्र में अत्यंत प्रशंसनीय और अनुकरणीय बताया गया। आज के समय में, जब समाज का एक बड़ा वर्ग अपनी जड़ों से दूर होता जा रहा है, ऐसे में नीरा झा जैसे कलाकार संस्कृति को जीवित रखने का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहे हैं।

मुख्य भूमिकाओं में बिसेसर के रूप में शुभम कर्ण और तेतरी की भूमिका में रचना दास ने भी प्रभावशाली अभिनय किया। अन्य कलाकारों में संजीव बिदु, सत्यम कर्ण, राजेश कर्ण, मुकेश दत्त, रोहित सांड़िल्य, डॉ. सुरेंद्र झा, छवि दास, सुप्रिया मिश्रा, मृत्युंजय चौधरी, अनुज कुमार, रजत राणा एवं सुबोध कुमार साहा आदि ने दमदार प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया।
तत्कालीन सत्य घटना पर आधारित इस नाटक में सुन्दरम चौधरी के संगीत एवं गायन ने प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया। स्नेहा झा और आरती मिश्रा के संगीतमय सहयोग ने भी नाटक को ऊँचाई प्रदान की। मिथिलांगन द्वारा इस नाटक का मंचन पूर्व में भी किया जा चुका है, किन्तु भागलपुर में यह इसकी पहली प्रस्तुति रही।
‘सोन मछरिया’ ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि समाज के संवेदनशील मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने रखकर दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर किया।
