भारत-ईयू के बीच व्यापार समझौता बनेगा ट्रंप के टैरिफ की काट, जानिए इसके फायदे
नई दिल्ली। भारत ने यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय आयोग (ईसी) के अधिकारियों को 26 जनवरी को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया। कार्यक्रम के बाद भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होगें और व्यापार समझौते पर मुहर लग सकती है। यह ऐसे समय में होगा जब भारत के अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार अमेरिका के साथ रिश्ते ढलान पर हैं। यह समझौता भारत के लिए यूरोप के देशों में बड़ा बाजार खोजने में एक अहम कदम साबित हो सकता है।
यह जानना अहम है कि भारत और यूरोप के बीच साझेदारी के मौजूदा आंकड़े क्या हैं? यूरोपीय देशों के संगठन- ईयू और भारत के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर कब से चर्चा चल रही थी? दोनों पक्षों के बीच यह समझौता कितना बड़ा होगा? इससे भारत और यूरोपीय संघ को क्या फायदा होगा? किन-किन चीजों का आयात-निर्यात करते हैं भारत-ईयू?
1. भारत का ईयू को निर्यात
पेट्रोलियम उत्पाद: यह भारत के निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 17% है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद इन उत्पादों के निर्यात में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फार्मास्यूटिकल्स और रसायन: दवाइयां (विशेष रूप से जेनेरिक दवाएं) और रसायन भारत के निर्यात का 15% हिस्सा बनाते हैं। भारत को दुनिया की फार्मेसी माना जाता है और यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात में इनकी बड़ी भूमिका है।
इलेक्ट्रॉनिक सामान: इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात की हिस्सेदारी लगभग 11% है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में काफी तेजी आई है।
कपड़ा तैयार परिधान: कपड़ा उद्योग निर्यात का 10% हिस्सा कवर करता है। इसमें कपड़े, जूते (फुटवियर) और चमड़े के उत्पाद शामिल हैं।
मशीनरी और उपकरण: मशीनरी और बिजली के उपकरणों का निर्यात भी कुल निर्यात का 10% है।
धातु और खनिज उत्पाद: इसमें मुख्य रूप से लोहा, इस्पात (स्टील) और एल्यूमीनियम जैसे आधार धातु और खनिज उत्पाद शामिल हैं।
अन्य क्षेत्र: भारत यूरोपीय संघ को रत्न एवं आभूषण और समुद्री उत्पाद का भी निर्यात करता है।
