एआई से बढ़ेगी अमीर-गरीब की खाई, एंथ्रोपिक ने दी चेतावनी
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- January 23, 2026
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नई दिल्ली। टेक कंपनियां एआई को लेकर दावा करती रही हैं कि ये जिंदगी को आसान बनाएगा और काम करने के तरीके को बदलेगा। अमेजन और गूगल समर्थित एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक ने भारत में अपना पहला ऑफिस खोलते हुए एक एक रिपोर्ट जारी की है। कंपनी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार एआई का लाभ अमीर देशों तक सिमट रहा है, इससे कम आय वाले देशों के पीछे छूटने का गंभीर खतरा है। जहां विकसित देश एआई का उपयोग वर्क प्रोडक्टिविटी के लिए कर रहे हैं, वहीं विकासशील देश अब भी केवल एजुकेशनल उपयोग तक ही सीमित हैं।
माइक्रोसॉफ्ट के ट्रेंड्स की तरह एंथ्रोपिक ने भी पाया कि अमीर देशों के पास एडवांस एआई के लिए भुगतान करने की क्षमता अधिक है। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर प्रोडक्टिविटी में रफ्तार केवल विकसित देशों तक सीमित रही, तो गरीब देशों के लिए उनसे मुकाबला करना नामुमकिन हो जाएगा।
एंथ्रोपिक ने अपने क्लाउड चैटबॉट के साथ हुए 10 लाख से ज्यादा इंटरैक्शंस का विश्लेषण किया। इसमें फ्री यूजर्स, पेड सब्सक्राइबर्स और एंटरप्राइज क्लाइंट्स शामिल थे। स्टडी में पाया गया कि कम आय वाले देशों के यूजर्स अभी एआई के फ्री एक्सेस पर ही निर्भर हैं और इसका उपयोग बुनियादी शिक्षा के लिए कर रहे हैं। इसके विपरीत अमेरिका, यूके और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में एआई जटिल सॉफ्टवेयर इंजीरियरिंग पर्सनल प्रोडक्टिविटी और एंटरप्राइज कार्यों के लिए किया जा रहा है।
एंथ्रोपिक ने अपने क्लाउड चैटबॉट के साथ हुए 10 लाख से ज्यादा इंटरैक्शंस का विश्लेषण किया। इसमें फ्री यूजर्स, पेड सब्सक्राइबर्स और एंटरप्राइज क्लाइंट्स शामिल थे। स्टडी में पाया गया कि कम आय वाले देशों के यूजर्स अभी एआई के फ्री एक्सेस पर ही निर्भर हैं और इसका उपयोग बुनियादी शिक्षा के लिए कर रहे हैं। इसके विपरीत अमेरिका, यूके और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में एआई जटिल सॉफ्टवेयर इंजीरियरिंग पर्सनल प्रोडक्टिविटी और एंटरप्राइज कार्यों के लिए किया जा रहा है।
