गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने से कुछ देशों की ना? जानिए किसने क्या कहा

 गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने से कुछ देशों की ना? जानिए किसने क्या कहा

वॉशिंगटन। गाजा शांति बोर्ड में शामिल होने से कई देशों ने मना कर दिया है। कई देशों ने फैसला टाल दिया है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और ढांचे के सम्मान को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए फिलहाल शामिल होने से इनकार किया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने कहा कि उनका देश सहयोगियों के साथ इस प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा है, लेकिन अभी समर्थन नहीं दिया है। यूरोपीय संघ ने भी कहा है कि सदस्य देशों के बीच बातचीत जारी है और अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।गाजा शांति बोर्ड में स्थायी सदस्यता के लिए और वहां पुनर्निर्माण के लिए कथित तौर पर एक अरब डॉलर का शुल्क रखा गया है। हालांकि व्हाइट हाउस का कहना है कि कोई अनिवार्य न्यूनतम शुल्क नहीं है और अल्पकालिक भागीदारी के लिए भुगतान आवश्यक नहीं होगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में गाजा पट्टी में स्थायी शांति, पुनर्निर्माण और अस्थायी शासन की निगरानी के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ बनाने का एलान किया। इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर के कई देशों के नेताओं को अपने प्रस्तावित ‘गाजा शांति बोर्ड’ में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।

ट्रंप के अनुसार यह अंतरराष्ट्रीय निकाय शुरुआत में युद्ध के बाद गाजा के भविष्य को दिशा देने पर ध्यान देगा और बाद में अपने दायरे का विस्तार कर वैश्विक शांति प्रयासों पर काम करेगा। ट्रंप ने इस बोर्ड को ‘अब तक का सबसे प्रभावशाली और निर्णायक समूह’ बताया है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति खुद इसके अध्यक्ष हैं।

इस पहल को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ देशों ने इसमें शामिल होने की सहमति दी है, जबकि कुछ ने इनकार किया है या अभी निर्णय को टाल दिया है। कई देशों ने इसके अधिकार क्षेत्र, संरचना और संयुक्त राष्ट्र से इसके संबंधों को लेकर सवाल भी उठाए हैं।

इन देशों को मिला निमंत्रण

जिन देशों ने सार्वजनिक रूप से निमंत्रण मिलने की पुष्टि की है, उनमें जॉर्डन, अर्जेंटीना, मिस्र, पराग्वे, पाकिस्तान, ग्रीस, तुर्किये, अल्बानिया, हंगरी, साइप्रस, कनाडा, इजरायल, भारत, फ्रांस, रूस, बेलारूस, स्लोवेनिया, थाईलैंड, वियतनाम, कजाकिस्तान, मोरक्को और यूरोपीय संघ का कार्यकारी अंग शामिल हैं। तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी तक कई नेताओं से संपर्क किया गया है।