सुशीला कार्की नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री, संसद हुई भंग,
- दिल्ली राजनीति राष्ट्रीय विदेश
Political Trust
- September 12, 2025
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काठमांडू। नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रहीं सुशीला कार्की अब नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनेंगी। उनके नाम पर सहमति बन गई है। बता दें कि उनके नाम को लेकर पिछले कई दिनों से चर्चा चल रही थी।
नेपाल में युवा पीढ़ी के हिंसक प्रदर्शनों के बाद उपजे राजनीतिक संकट के बीच शुक्रवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही नेपाल की संसद को भी भंग कर दिया गया है।
आज शुक्रवार को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के साथ सेना प्रमुख जनरल अशोक राज की मौजूदगी में जनरेशन-जी के नेतृत्वकर्ताओं ने एक बैठक की। जिसमें पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने पर सहमति बनी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह आज रात 9 बजे राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण करेंगी।
जानिए कौन हैं सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की का जन्म सात जून 1952 को विराटनगर में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके अलावा उन्होंने कानून की पढ़ाई नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सटी से की। इसके बाद वकालत और कानूनी सुधारों के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक मामलों की सुनवाई की, जिनमें चुनावी विवाद भी शामिल थे।
आज शुक्रवार को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के साथ सेना प्रमुख जनरल अशोक राज की मौजूदगी में जनरेशन-जी के नेतृत्वकर्ताओं ने एक बैठक की। जिसमें पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने पर सहमति बनी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह आज रात 9 बजे राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण करेंगी।
जानिए कौन हैं सुशीला कार्की?
सुशीला कार्की का जन्म सात जून 1952 को विराटनगर में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके अलावा उन्होंने कानून की पढ़ाई नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सटी से की। इसके बाद वकालत और कानूनी सुधारों के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक मामलों की सुनवाई की, जिनमें चुनावी विवाद भी शामिल थे।
