SETU 2026: सहयोगात्मक सामाजिक विकास को लेकर राष्ट्रीय संवाद का शुभारंभ
नई दिल्ली -बंधन कोन्नगर ने सहयोगात्मक सामाजिक विकास पर भारत के प्रथम राष्ट्रीय नेतृत्व शिखर सम्मेलन ‘SETU – India’s National Leadership Summit on Collaborative Social Development’ का आयोजन किया। ‘नीति से व्यवहार तक: व्यापक सामाजिक प्रभाव के लिए साझेदारियों का निर्माण’ विषय पर आयोजित इस शिखर सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, सरकारी अधिकारियों, कॉर्पोरेट CSR एवं ESG विशेषज्ञों, परोपकार क्षेत्र के प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और विकास क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
शिखर सम्मेलन का उद्देश्य सरकार, उद्योग, नागरिक समाज, समुदायों और अन्य हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए समावेशी, मापनीय और टिकाऊ सामाजिक विकास के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संवाद एवं कार्रवाई को बढ़ावा देना था। इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित यह सम्मेलन सामाजिक विकास के क्षेत्र में सहयोगात्मक प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा।
उद्घाटन शिखर सम्मेलन में भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के राज्य मंत्री श्री कमलेश पासवान, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के CEO श्री अरुण कुमार पिल्लई, बंधन समूह के चेयरमैन श्री चंद्र शेखर घोष तथा बंधन कोन्नगर के CEO श्री संजीब कुमार दास सहित वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधि, CSR एवं ESG क्षेत्र के नेतृत्वकर्ता, विकास विशेषज्ञ, परोपकारी संस्थाएं, शिक्षाविद और कार्यान्वयन साझेदार उपस्थित रहे।
SETU बनेगा सहयोगात्मक सामाजिक विकास का मंच
SETU को सहयोगात्मक सामाजिक विकास पर केंद्रित एक सतत राष्ट्रीय संवाद के मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नीति, संसाधनों, कार्यान्वयन और समुदायों की आवश्यकताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। मंच के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के बीच संवाद, जमीनी अनुभवों का आदान-प्रदान, साक्ष्य-आधारित प्रभाव अध्ययन, साझेदारी घोषणाएं तथा समावेशी विकास में योगदान देने वाले संगठनों को सम्मानित करने जैसे प्रयासों को बढ़ावा दिया जाएगा।

SETU का लक्ष्य नीति से व्यवहार, पायलट परियोजना से व्यापक स्तर, हस्तक्षेप से प्रभाव और गतिविधि से मापनीय परिणाम की दिशा में विकास के प्रयासों को आगे बढ़ाना है।
विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे: चंद्र शेखर घोष
बंधन समूह के चेयरमैन श्री चंद्र शेखर घोष ने कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी सार्थक होगा, जब विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण समुदाय, महिलाएं, युवा और वंचित समुदाय विकास के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन के सक्रिय भागीदार होने चाहिए।
उन्होंने कहा कि CSR का अगला चरण केवल खर्च और गतिविधियों तक सीमित न रहकर मापनीय एवं दीर्घकालिक प्रभाव की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। SETU कल्याण से सशक्तीकरण, अलग-अलग हस्तक्षेपों से साझेदारी और अल्पकालिक गतिविधियों से दीर्घकालिक सामाजिक मूल्य की ओर बढ़ने का आह्वान है।
कौशल, आजीविका और समावेशी विकास पर चर्चा
शिखर सम्मेलन के प्रथम सत्र का उद्घाटन श्री कमलेश पासवान और श्री अरुण कुमार पिल्लई ने किया। सत्र में समावेशी विकास के लिए नीति, कौशल विकास और संस्थागत साझेदारी के महत्व पर चर्चा हुई।
श्री चंद्र शेखर घोष ने ‘समावेशन से संस्थान तक: जमीनी स्तर से विकास मॉडल का निर्माण’ विषय पर नेतृत्व संबोधन दिया। उन्होंने ऐसे विकास मॉडल तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जो व्यक्तिगत हस्तक्षेपों से आगे बढ़कर टिकाऊ संस्थानों और प्रणालियों का रूप ले सकें।
सम्मेलन में कौशल विकास, टिकाऊ आजीविका एवं उद्यमिता, ऋण एवं बाजार, समुदाय-आधारित जलवायु कार्रवाई तथा स्वास्थ्य एवं शिक्षा की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
डॉ. भास्कर चटर्जी ने CSR की अनुपालन-केंद्रित भूमिका से सहयोगात्मक एवं मापनीय प्रभाव की दिशा में हुई यात्रा पर मुख्य वक्तव्य दिया। वहीं NABARD की CGM सुश्री शेफाली अग्रवाल ने Graduated Rural Income Generation Programme (GRIP) तथा ग्रामीण क्षेत्रों के अत्यंत गरीब परिवारों को सक्षम बनाने के लिए किए जा रहे नवोन्मेषी प्रयासों पर विचार साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान बंधन कोन्नगर और LEAP 300 के बीच साझेदारी की घोषणा के साथ प्रभाव अध्ययन भी प्रस्तुत किया गया। आजीविका कार्यक्रमों से लाभान्वित लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। इसके अतिरिक्त, बंधन कोन्नगर के CSR साझेदारों को SETU Bandhan CSR Awards से सम्मानित किया गया।
SETU विचारों और कार्यों के बीच सेतु बनेगा: संजीब कुमार दास
बंधन कोन्नगर के CEO श्री संजीब कुमार दास ने कहा कि SETU, बंधन कोन्नगर की 25 वर्षों की विकास यात्रा का अगला चरण है और यह विचारों एवं कार्यों के बीच महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि संगठन ऐसी साझेदारियों को बढ़ावा देना चाहता है, जो परिणाम-केंद्रित, व्यापक स्तर पर लागू की जा सकने वाली और जमीनी वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील हों। शिक्षा, कौशल विकास, आजीविका, वित्तीय समावेशन और जलवायु-लचीलापन जैसे क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर समुदायों के लिए अधिक अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
25 वर्षों से सामाजिक विकास के लिए कार्यरत है बंधन कोन्नगर
बंधन कोन्नगर एक गैर-सरकारी संगठन है, जिसने वर्ष 2001 में गरीबी उन्मूलन और महिला सशक्तीकरण के उद्देश्यों के साथ अपनी गतिविधियां शुरू की थीं। संगठन का मानना है कि स्थायी सामाजिक परिवर्तन केवल एक हस्तक्षेप से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित प्रयास और मजबूत साझेदारियां आवश्यक हैं।
पिछले 25 वर्षों में संगठन ने शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण, टिकाऊ आजीविका, युवाओं के कौशल विकास, वित्तीय एवं डिजिटल साक्षरता, जलवायु कार्रवाई, सुरक्षित पेयजल एवं स्वच्छता तथा अत्यंत गरीब और संवेदनशील परिवारों के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए हैं।
मार्च 2026 तक बंधन कोन्नगर के कार्यक्रमों से 16 राज्यों में 44,13,099 परिवार प्रभावित हुए हैं। इसके स्वास्थ्य कार्यक्रमों से 24.7 लाख से अधिक लाभार्थियों, वित्तीय साक्षरता पहलों से 15 लाख से अधिक लाभार्थियों तथा कौशल विकास कार्यक्रमों से 46,000 से अधिक युवाओं तक पहुंच बनाई गई है।
संगठन का दृष्टिकोण निर्भरता के बजाय समुदायों की क्षमता-वृद्धि और सशक्तीकरण पर आधारित है। इसके Targeting the Hardcore Poor कार्यक्रम के तहत अत्यंत गरीब परिवारों को उत्पादक परिसंपत्तियों के सहयोग के साथ प्रशिक्षण, मार्गदर्शन, वित्तीय अनुशासन और सरकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है, ताकि वे टिकाऊ आजीविका की दिशा में आगे बढ़ सकें।http://Politicaltrust.in
