ब्रिक्स में पारंपरिक चिकित्सा सहयोग को नई दिशा, विशेषज्ञ कार्य समूह के गठन का स्वागत

 ब्रिक्स में पारंपरिक चिकित्सा सहयोग को नई दिशा, विशेषज्ञ कार्य समूह के गठन का स्वागत

नई दिल्ली। 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए नई दिल्ली घोषणापत्र में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (TCIM) में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। घोषणापत्र में ब्रिक्स स्वास्थ्य ट्रैक के तहत पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा पर ब्रिक्स विशेषज्ञ कार्य समूह के प्रस्तावित गठन का स्वागत किया गया है।

प्रस्तावित विशेषज्ञ कार्य समूह ब्रिक्स देशों के बीच पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े अनुसंधान, ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान तथा साक्ष्य-आधारित तरीकों को आगे बढ़ाने के लिए एक मंच के रूप में काम कर सकता है। इसके साथ ही पारंपरिक चिकित्सा की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता को उचित नियामक व्यवस्था के माध्यम से सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा को मान्यता मिलना वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विशेषज्ञ कार्य समूह सदस्य देशों को ज्ञान साझा करने, शोध को मजबूत करने और साक्ष्य-आधारित तरीकों को आगे बढ़ाने का उपयोगी मंच प्रदान कर सकता है।

घोषणापत्र में औषधीय पौधों और हर्बल तैयारियों पर अनुसंधान में सहयोग बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि ब्रिक्स देशों की साझा पारंपरिक फार्माकोपिया सुरक्षित, प्रभावी और किफायती चिकित्सीय उत्पादों के विकास का आधार बन सकती है। इसके लिए अनुसंधान, दस्तावेजीकरण, ज्ञान साझा करने और वैज्ञानिक साक्ष्य तैयार करने पर सहयोग बढ़ाने की संभावना है।

आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि प्रस्तावित विशेषज्ञ कार्य समूह पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा के क्षेत्र में साक्ष्य साझा करने, अनुसंधान सहयोग बढ़ाने तथा गुणवत्ता और नियामक दृष्टिकोण को बेहतर बनाने के लिए केंद्रित मंच उपलब्ध करा सकता है।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान 21 जुलाई 2026 को चंडीगढ़ में TCIM पर ब्रिक्स बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसमें अनुसंधान, शिक्षा, ज्ञान के आदान-प्रदान और नियामक ढांचे में सहयोग बढ़ाने के साथ प्रस्तावित विशेषज्ञ कार्य समूह के काम की रूपरेखा पर भी चर्चा हुई।

नई दिल्ली घोषणापत्र में पारंपरिक चिकित्सा को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) और मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ते हुए साक्ष्य, गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता को प्रमुख आधार माना गया है। भारत के लिए यह पहल आयुर्वेद और व्यापक आयुष प्रणाली के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग, अनुसंधान और वैज्ञानिक साक्ष्य निर्माण को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।http://Politicaltrust.in