योग आज ‘ग्लोबल स्प्रिट’ है
New Delhi –21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया। 21 जून 2026 को हम 12वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने जा रहे हैं। इस वर्ष की थीम है – “Yoga for Healthy Ageing” । योग से हम वैभवशाली जीवन, नीरोगी काया, परमात्मा से आत्मिक जुड़ाव, स्वस्थ परिवार, और चरित्रवान देश का निर्माण कर सकते हैं।
योग की उत्पत्ति संस्कृत धातु ‘युज’ से हुई है, जिसका अर्थ है – जोड़ना। शिव को पहला योग गुरू माना गया। महर्षि पतंजलि को ‘आधुनिक योग का पिता’ कहा जाता है। योग सैंकड़ों साल पुरानी भारतीय पद्धति है। योग तन-मन को स्वस्थ रखता है। योग से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, आयुष बल और तेज मिलता है। योग मनुष्य की आंतरिक शक्ति को केंद्रित करके कटाक्ष सहने और आलोचनाओं को चीरकर सफलता की मंजिल पर दस्तक देने में सक्षम बनाता है। योग शरीर की मरम्मत करने वाला दिव्य विज्ञान है, जिससे मनुष्य की काया को संकल्प के अमृत से सींचकर स्वास्थ्य की क्रांति का शंखनाद किया जाता है। योग व्यक्ति के अंतर्द्वंद्व को समाप्त करके पूरे विश्व को एक परिवार की तरह एकजुट करने में निर्णायक भूमिका अदा करता है। योग आज ‘ग्लोबल स्प्रिट’ बन चुका है।
योग से नैराश्य, कुंठा और दुर्भावनाओं का अंत किया जा सकता है। योग हमें प्रबल से प्रबलतम बनाता है। इससे जीवन में विश्वास की नई सुबह का उदय होता है। सद्भाव और शांति के लिए योग का अनुसरण करना आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय पर विश्व के अधिकांश देशों के प्रतिनिधि इस उत्सव में भाग लेकर भारत की इस वैश्विक मुहिम में अपनी आस्था जगा रहे हैं। यह वैश्विक एकता का प्रबल प्रतीक है, जो ऐतिहासिक और अभूतपूर्व है। जब हम अपनी जड़ों से जुड़े होते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत हमारा रास्ता नहीं रोक सकती। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विश्व पटल पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर वैश्विक एकजुटता की मुहिम में भारत की कूटनीति का शंखनाद है।
योग साधना एक ऐसी साधना है। जो नामुमकिन को मुमकिन बना देती है। ध्यान का अर्थ है, उन अदृश्य दीवारों को मिटाना, जो अज्ञानता ने बनाई हैं । योग जीवन जीने का तरीका है। योग का मतलब है-जोड़ना, आत्मा को परमात्मा से जोड़ना। इस लक्ष्य को पाने के लिए शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक एकाग्रता आवश्यक है और योग इसमें हमारी सहायता करता है। योग जीवन में नई आशा, उमंग, रोशनी जगाकर कर्त्तव्य पथ से भटके राहगीरों को पुनः पथ पर लौटने के लिए प्रेरित कर देता है।
आओ संकल्प लें, योग को जीवन का हिस्सा बनाएँगे। योग हमारी पुरातन भारतीय संस्कृति की विरासत है, हमारी धरोहर है। दुनिया हमारी संस्कृति का बारीकी से अवलोकन कर रही है तथा भारत की विरासत – योग साधना को प्रणाम करने के साथ-साथ विश्वास से अपना रही है। योग जीवन के सभी अंतर्विरोध, क्लेश, नकारात्मक विचार आदि को नष्ट करके शांति, समृद्धि, धैर्य और संबल प्रदान करता है। देश के उज्ज्वल भविष्य के गढ़ने में ‘मील का पत्थर’ है। माता-पिता प्रथम पाठशाला यानि घर के गुरू हैं । सभी अभिभावकों से निवेदन है कि बच्चों को योग साधना से ओत-प्रोत करके भारत की प्राचीन विरासत को सहेजने में अहम् भूमिका अदा करें। देश के हुक्मरानों से निवेदन है कि योग साधना की अलख् स्कूल और कालेजों में जगाकर निर्णायक भूमिका अदा करें, ताकि युवाओं के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण हो सके।
अंत में, योग से
तन-मन को मजबूत बनाइए। बुद्धि को धार दीजिए।
यही योग का मर्म है।।
ज्योति स्वरूप गौड़
उप-निरीक्षक
दिल्ली‘-पुलिस
