मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में पहली बार टनल हुड तकनीक का इस्तेमाल, हाई-स्पीड यात्रा होगी अधिक सुरक्षित और शांत
नई दिल्ली– भारत की पहली हाई-स्पीड रेल परियोजना मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में पर्वतीय सुरंगों के लिए पहली बार अत्याधुनिक टनल हुड (Tunnel Hood) तकनीक का निर्माण किया जा रहा है। यह तकनीक रेलवे सुरंगों में उत्पन्न होने वाले वायु दबाव और शोर को नियंत्रित करने के लिए विकसित की गई है, जिससे बुलेट ट्रेन का संचालन अधिक सुरक्षित, सुचारू और आरामदायक बनेगा।
मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर कठिन भौगोलिक क्षेत्रों से होकर गुजरता है। परियोजना में महाराष्ट्र की सात और गुजरात की एक पर्वतीय सुरंग शामिल है। इन सभी सुरंगों के दोनों सिरों पर विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए टनल हुड लगाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार जब कोई हाई-स्पीड ट्रेन सुरंग में प्रवेश करती है तो वह अपने आगे बड़ी मात्रा में हवा को धक्का देती है, जिससे टनल के भीतर दबाव तरंगें (प्रेशर वेव्स) उत्पन्न होती हैं। यदि इनका उचित प्रबंधन न किया जाए तो ट्रेन के सुरंग से बाहर निकलते समय तेज धमाके जैसी आवाज़, जिसे टनल बूम कहा जाता है, पैदा हो सकती है।
इसी समस्या के समाधान के लिए टनल हुड्स को सुरंग के प्रवेश और निकास द्वार पर लगाया जाता है। ये खुले वातावरण और सुरंग के बीच एक संक्रमण क्षेत्र का कार्य करते हैं तथा हवा के प्रवाह को नियंत्रित करके दबाव में होने वाले अचानक बदलाव को कम करते हैं। इससे शोर में कमी आती है और ट्रेन संचालन की एयरोडायनामिक दक्षता बढ़ती है।
परियोजना में बनाए जा रहे टनल हुड्स में विशेष प्रेशर-रिलीफ वेंट्स या खिड़कियां भी शामिल हैं। ट्रेन के सुरंग में प्रवेश करने पर ये वेंट्स संपीड़ित हवा के एक हिस्से को धीरे-धीरे बाहर निकलने देते हैं, जिससे दबाव तरंगों की तीव्रता कम होती है और वायु प्रवाह अधिक संतुलित बना रहता है।
अधिकारियों के अनुसार इस तकनीक का उद्देश्य 300 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक गति से चलने वाली ट्रेनों के सुरक्षित और कुशल संचालन को सुनिश्चित करना, टनल बूम और शोर को कम करना तथा आसपास के क्षेत्रों में होने वाले प्रभाव को न्यूनतम करना है।
गौरतलब है कि टनल हुड्स जापान सहित कई देशों की हाई-स्पीड रेल प्रणालियों में उपयोग किए जाते हैं। मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में इस तकनीक को अपनाना भारत में विश्वस्तरीय इंजीनियरिंग मानकों और आधुनिक रेल अवसंरचना के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
