भारत की अध्यक्षता में जारी हुआ ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’, वैश्विक कृषि सहयोग को मिली नई दिशा
Political Trust Magazine
इंदौर/नई दिल्ली-भारत की अध्यक्षता में इंदौर में आयोजित ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्रिस्तरीय बैठक का समापन सर्वसम्मति से अपनाए गए ‘ब्रिक्स इंदौर डिक्लेरेशन’ के साथ हुआ। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी देते हुए कहा कि यह घोषणा-पत्र किसान-केंद्रित, जलवायु-सहनीय और टिकाऊ कृषि व्यवस्था की दिशा में वैश्विक सहयोग का नया रोडमैप है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि ब्रिक्स देशों की कृषि मंत्री एवं अधिकारी स्तरीय बैठकों में खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार, जलवायु परिवर्तन, डिजिटल कृषि और किसानों की आजीविका से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी, 42 प्रतिशत कृषि भूमि और 42 प्रतिशत खाद्यान्न उत्पादन का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए इन देशों की सामूहिक पहल वैश्विक कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखती है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ का केंद्र किसान है। इसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण, कृषि व्यापार, नवाचार, निवेश, जलवायु-अनुकूल खेती और सतत कृषि विकास को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता दर्ज की गई है। उन्होंने इसे केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक इच्छाशक्ति और साझा जिम्मेदारी का प्रतीक बताया।
बैठक में चार नई वैश्विक संस्थागत पहलों पर सहमति बनी। इनमें ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रो-इकोलॉजी एंड रीजेनेरेटिव एग्रीकल्चर, ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर, ग्लोबल फोरम ऑन फार्मर्स राइट्स इन सीड सिस्टम्स तथा ब्रिक्स एग्रीएन (AgriN) शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य प्राकृतिक खेती, डिजिटल तकनीक, देशी बीजों के संरक्षण, कृषि अनुसंधान, आनुवंशिक संसाधनों और कृषि आदानों के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाना है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि डिजिटल कृषि नेटवर्क का समन्वय भारत में आईआईटी दिल्ली द्वारा किया जाएगा, जबकि प्राकृतिक खेती से जुड़े सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों ने कृषि अनुसंधान को खेतों तक पहुंचाने के लिए ‘नॉलेज टू एक्शन हब’ विकसित करने पर भी सहमति व्यक्त की है, ताकि प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक और नवाचार सीधे किसानों तक पहुंच सकें।
कृषि व्यापार पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सदस्य देशों ने निष्पक्ष, समावेशी और पारदर्शी बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। साथ ही BRICS Grain Exchange जैसी पहलों पर भी विचार-विमर्श को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है।
जलवायु परिवर्तन, कार्बन क्रेडिट और खाद्य हानि जैसे विषयों पर चर्चा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि रीजेनेरेटिव फार्मिंग, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियां और खाद्य अपव्यय में कमी भविष्य की प्रमुख प्राथमिकताएं होंगी। उन्होंने कहा कि कार्बन क्रेडिट व्यवस्था के माध्यम से किसानों को अतिरिक्त लाभ दिलाने की दिशा में भी प्रयास जारी हैं।
उर्वरकों की बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को यूरिया 266 रुपये प्रति बोरी और डीएपी 1350 रुपये प्रति बोरी की दर पर उपलब्ध कराई जा रही है तथा अतिरिक्त लागत का पूरा भार केंद्र सरकार वहन कर रही है।
उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, एग्री-स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन देने और आधुनिक तकनीक को छोटे किसानों तक पहुंचाने पर भी विशेष जोर दिया गया है।
इंदौर की मेजबानी की सराहना करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यहां के आतिथ्य, सांस्कृतिक विरासत और व्यवस्थाओं ने सभी प्रतिनिधियों को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने मेघदूत गार्डन में पौधारोपण कर ‘ब्रिक्स वाटिका’ की स्थापना भी की।
उन्होंने कहा कि इंदौर में संपन्न यह बैठक भारत की कृषि कूटनीति और वैश्विक सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो आने वाले वर्षों में किसानों और कृषि क्षेत्र को व्यापक लाभ पहुंचाने का आधार बनेगी।
