महंगा ईंधन ने बिगाडा उद्योग और रसोई का बजट, टैक्सी वाहनों ने बढ़ाया किराया
नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की 10 दिन में चौथी बार बढ़ी कीमतों ने ट्रांसपोर्ट, मंडी कारोबार, होटल उद्योग और छोटे व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। सोमवार को प्रति लीटर पेट्रोल 102 रुपये और डीजल 95.47 रुपये पहुंच गया। टैक्सी संचालकों ने प्रति किलोमीटर एक रुपये किराया बढ़ाया है। 10 दिनों में ही पेट्रोल 7.20 रुपये और डीजल 7.55 रुपये महंगा हो चुका है। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक, डीजल महंगा होने से ट्रकों की परिचालन लागत बढ़ी है। इसका असर अब किराना, फल-सब्जी, डेयरी और निर्माण सामग्री के दामों पर भी दिखने लगा है। हालांकि, रुक-रुककर बढ़ती कीमतों से लागत नहीं एकमुश्त ढुलाई बढ़ रही। मुनाफा से समझौता कर ढुलाई हो रही है। हालांकि, टैक्सी, वैन चालक किराया बढ़ाने लगे हैं। टैक्सी चालकों ने प्रति किलोमीटर एक रुपये तक किराया बढ़ा दिया है। स्कूल वैन संचालक भी नए सत्र में बड़ा किराया ही लेंगे। टैक्सी कारोबारी के मुताविक, सेवन सीटर कार के लिए अभी 12 रुपये प्रति किमी लिए जा रहे हैं। ईंधन की कीमत में पांच रुपये तक बढ़त के बावजूद किराया नहीं बढ़ा था लेकिन सोमवार को ढाई रुपये बढ़ने के बाद पुरानी दर पर संचालन मुमकिन नहीं। इसके बाद न्यूनतम एक रुपये तक किराया बढ़ा दिया गया है।
डीजल की कीमत बढ़ने से खेती की लागत बढ़ेगी
धान की नर्सरी और रोपाई का समय शुरू होने वाला है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती के बीच ट्यूबवेल संचालन के लिए डीजल पर निर्भरता बढ़ जाती हैं। ऐसे में खेती की लागत बढ़ने की आशंका है। कृषि यंत्रों का किराया और सिंचाई खर्च बढ़ सकता है। फसल उत्पादन लागत बढ़ेगी तो मुनाफा के लिए ऊंची दर पर बिक्री होगी।
उत्पादन, परिवहन लागत का ग्राहकों पर पड़ेगा असर
उद्यमी केके चंदानी के मुताबिक, ईंधन महंगा होने से उत्पादन लागत भी प्रभावित हो रही है। गत्ता, खाद्यान्न, डेयरी, आटा, फर्नीचर और पैकेजिंग उद्योग में कच्चे माल की ढुलाई महंगी हो गई है। मंडियों में बाहर से आने वाले फल और सब्जियों की लागत भी बढ़ रही है। पहले ही मंदी से जूझते उद्योगों के लिए परिवहन लागत बढ़ने से उत्पादों की कीमत बढ़ेगी या वजन कम करना होगा। इसका असर उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा।
