योगी सरकार का बेटियों को तोहफा: 70 हजार छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी की सौगात 400 करोड़ का बजट आवंटित
- उत्तर प्रदेश राजनीति राष्ट्रीय
Political Trust
- May 16, 2026
- 0
- 36
- 1 minute read
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश की बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को नई उड़ान देने के लिए एक और बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई कर रही 70 हजार से अधिक मेधावी छात्राओं को सरकार जल्द ही मुफ्त इलेक्ट्रिक स्कूटी का शानदार तोहफा देने जा रही है। विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस महत्वाकांक्षी ‘रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना’ को धरातल पर उतारने के लिए शासन स्तर पर तैयारियां युद्ध स्तर पर तेज कर दी गई हैं। उच्च शिक्षा निदेशालय ने राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों से पात्र छात्राओं का डेटा जुटाना शुरू कर दिया है।
पर्यावरण और जेब दोनों का ख्याल
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि छात्राओं को पेट्रोल और ईंधन के भारी-भरकम खर्च से राहत देने तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सामान्य स्कूटी के बजाय ‘इलेक्ट्रिक स्कूटी’ (E-Scooter) वितरित करने का निर्णय लिया है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, एक इलेक्ट्रिक स्कूटी की सरकारी खरीद लागत लगभग 55 हजार रुपये आ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए 400 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पहले ही आवंटित कर दिया था। तकनीकी रूप से इस बजट से लगभग 72,727 स्कूटी खरीदी जा सकती हैं, लेकिन आयोजन, परिवहन और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं के खर्च को शामिल करते हुए कम से कम 70 हजार से अधिक बेटियों को इसका सीधा लाभ मिलना तय माना जा रहा है।
अगले छह महीनों में शुरू होगा वितरण
योजना के क्रियान्वयन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष एक विस्तृत रोडमैप और प्रस्तुति (Presentation) दी जा चुकी है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि अगले छह महीनों के भीतर पात्र छात्राओं के हाथों में स्कूटी की चाबी थमा दी जाएगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व में महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर भी सार्वजनिक मंच से बेटियों को जल्द ही स्कूटी वितरित किए जाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
संस्थानों से मांगा गया अंतिम वर्ष का रिकॉर्ड
योजना के सुचारू संचालन, पात्रता के कड़े मानकों और स्कूटी की तकनीकी विशिष्टताओं को तय करने के लिए शासन स्तर पर दो उच्च स्तरीय समितियों का गठन किया गया था। पिछले साल के कुछ नीतिगत ठहराव के बाद अब शिक्षा निदेशालय पूरी तरह एक्टिव मोड में है। निदेशालय ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों, संबद्ध कॉलेजों और उच्च तकनीकी संस्थानों से स्नातक (UG) एवं परास्नातक (PG) अंतिम वर्ष उत्तीर्ण करने वाली मेधावी छात्राओं की सूचियां तलब कर ली हैं। सरकार के इस कदम से न सिर्फ बेटियों को कॉलेज आने-जाने में सुविधा होगी, बल्कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की छात्राओं में उच्च शिक्षा के प्रति प्रतिस्पर्धा और रुझान भी तेजी से बढ़ेगा।
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि छात्राओं को पेट्रोल और ईंधन के भारी-भरकम खर्च से राहत देने तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सामान्य स्कूटी के बजाय ‘इलेक्ट्रिक स्कूटी’ (E-Scooter) वितरित करने का निर्णय लिया है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, एक इलेक्ट्रिक स्कूटी की सरकारी खरीद लागत लगभग 55 हजार रुपये आ रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए 400 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट पहले ही आवंटित कर दिया था। तकनीकी रूप से इस बजट से लगभग 72,727 स्कूटी खरीदी जा सकती हैं, लेकिन आयोजन, परिवहन और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं के खर्च को शामिल करते हुए कम से कम 70 हजार से अधिक बेटियों को इसका सीधा लाभ मिलना तय माना जा रहा है।
अगले छह महीनों में शुरू होगा वितरण
योजना के क्रियान्वयन को लेकर उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष एक विस्तृत रोडमैप और प्रस्तुति (Presentation) दी जा चुकी है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि अगले छह महीनों के भीतर पात्र छात्राओं के हाथों में स्कूटी की चाबी थमा दी जाएगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व में महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर भी सार्वजनिक मंच से बेटियों को जल्द ही स्कूटी वितरित किए जाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
संस्थानों से मांगा गया अंतिम वर्ष का रिकॉर्ड
योजना के सुचारू संचालन, पात्रता के कड़े मानकों और स्कूटी की तकनीकी विशिष्टताओं को तय करने के लिए शासन स्तर पर दो उच्च स्तरीय समितियों का गठन किया गया था। पिछले साल के कुछ नीतिगत ठहराव के बाद अब शिक्षा निदेशालय पूरी तरह एक्टिव मोड में है। निदेशालय ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों, संबद्ध कॉलेजों और उच्च तकनीकी संस्थानों से स्नातक (UG) एवं परास्नातक (PG) अंतिम वर्ष उत्तीर्ण करने वाली मेधावी छात्राओं की सूचियां तलब कर ली हैं। सरकार के इस कदम से न सिर्फ बेटियों को कॉलेज आने-जाने में सुविधा होगी, बल्कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों की छात्राओं में उच्च शिक्षा के प्रति प्रतिस्पर्धा और रुझान भी तेजी से बढ़ेगा।
