डेढ़ दशक पहले गायब हुई हथिनी गुजरात में मिली, मालिक ने कोर्ट में ल गाई रिहाई की अपील
- गुजरात राष्ट्रीय
Political Trust
- May 16, 2026
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गाजियाबाद। करीब डेढ़ दशक पहले गाजियाबाद से रहस्यमय तरीके से गायब हुई एक हथिनी अब गुजरात में मिलने के बाद फिर चर्चा में आ गई है। वर्ष 2008 में चोरी हुई यह हथिनी अब गुजरात के जामनगर स्थित राधे कृष्ण टेंपल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट में होने की जानकारी सामने आई है। हथिनी के मालिक गयूर ने अब कोर्ट में उसकी रिहाई के लिए अर्जी दाखिल की है और लंबे कानूनी संघर्ष के बाद उन्हें अपनी हथिनी वापस मिलने की उम्मीद जगी है।
गाजियाबाद के फरुखनगर निवासी गयूर ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2000 में बिहार के प्रसिद्ध सोनपुर मेले से करीब ढाई लाख रुपये में 13 साल की हथिनी खरीदी थी। उस समय हथिनी की ऊंचाई लगभग साढ़े सात फीट थी। गयूर के अनुसार उनके परिवार का हाथियों से जुड़ाव कोई नया नहीं है, बल्कि यह परंपरा बहादुर शाह जफर के दौर से चली आ रही है। उनके पूर्वज हाथियों की देखभाल और प्रशिक्षण का कार्य करते थे और उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भी हथिनी को अपने परिवार का हिस्सा बनाया था।गयूर ने बताया कि उन्होंने हथिनी की बेहद अच्छे तरीके से देखभाल की थी। इलाके में वह आकर्षण का केंद्र बन गई थी और एक बार तो 26 जनवरी की परेड में भी उसने प्रथम पुरस्कार हासिल किया था। लेकिन वर्ष 2008 में गयूर एक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए और लंबे समय तक कोमा में रहे। इसी दौरान हथिनी की देखभाल के लिए रखे गए दो कर्मचारियों पर उसे चोरी कर ले जाने का आरोप लगा। पीड़ित के मुताबिक जब उन्हें होश आया और उन्होंने अपनी हथिनी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की, तो पता चला कि उसे जम्मू-कश्मीर ले जाया गया है। इंटरनेट पर तस्वीर देखने के बाद वह खुद जम्मू-कश्मीर पहुंचे, लेकिन वहां भी उन्हें हथिनी नहीं सौंपी गई। इसके बाद उन्होंने कानूनी लड़ाई शुरू की।
गयूर के अधिवक्ता दिलशाद चौधरी ने बताया कि हथिनी की चोरी को लेकर लक्ष्मण और लक्की नाम के दो लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे, जो हथिनी की देखभाल करते थे। जब स्थानीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद थाना टीला मोड़ पुलिस ने जांच शुरू की।
वकील के अनुसार पुलिस जांच में पता चला कि हथिनी को गुजरात के जामनगर स्थित राधे कृष्ण टेंपल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट भेजा गया है। जब निचली अदालत में हथिनी की रिहाई के लिए आवेदन किया गया तो जानकारी मिली कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हथिनी को वहां शिफ्ट किया गया था। इसी कारण लोअर कोर्ट में रिलीज आदेश निरस्त हो गया।
अब सेशन कोर्ट में हथिनी की रिहाई के लिए अर्जी दाखिल की गई है। गयूर और उनके परिवार को उम्मीद है कि वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें उनकी हथिनी वापस मिल सकेगी।
जानकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में रहने के दौरान वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने हथिनी की खराब देखभाल को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी ने हथिनी को बेहतर संरक्षण के लिए गुजरात भेजने का निर्णय लिया था।http://Politicaltrust.in
गयूर के अधिवक्ता दिलशाद चौधरी ने बताया कि हथिनी की चोरी को लेकर लक्ष्मण और लक्की नाम के दो लोगों के खिलाफ आरोप लगाए गए थे, जो हथिनी की देखभाल करते थे। जब स्थानीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया गया। इसके बाद थाना टीला मोड़ पुलिस ने जांच शुरू की।
वकील के अनुसार पुलिस जांच में पता चला कि हथिनी को गुजरात के जामनगर स्थित राधे कृष्ण टेंपल एलिफेंट वेलफेयर ट्रस्ट भेजा गया है। जब निचली अदालत में हथिनी की रिहाई के लिए आवेदन किया गया तो जानकारी मिली कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हथिनी को वहां शिफ्ट किया गया था। इसी कारण लोअर कोर्ट में रिलीज आदेश निरस्त हो गया।
अब सेशन कोर्ट में हथिनी की रिहाई के लिए अर्जी दाखिल की गई है। गयूर और उनके परिवार को उम्मीद है कि वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद उन्हें उनकी हथिनी वापस मिल सकेगी।
जानकारी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में रहने के दौरान वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संगठनों ने हथिनी की खराब देखभाल को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी ने हथिनी को बेहतर संरक्षण के लिए गुजरात भेजने का निर्णय लिया था।http://Politicaltrust.in
