राजधानी में ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाएगा 55 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड, तेज होगी आवाजाही
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- April 27, 2026
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नई दिल्ली। राजधानी में ट्रैफिक जाम से राहत और तेज आवाजाही के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने महात्मा गांधी रिंग रोड पर करीब 55 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाने की योजना को आगे बढ़ा दिया है। अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना को छह चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें पहला चरण कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस अड्डे (आईएसबीटी) से आश्रम या डीएनडी फ्लाईवे तक लगभग 11.5 किलोमीटर के हिस्से पर केंद्रित होगा।
अधिकारियों ने बताया कि इस हिस्से को प्राथमिकता इसलिए दी गई है क्योंकि यहां जमीन की उपलब्धता अपेक्षाकृत आसान है और यूटिलिटी शिफ्टिंग, पेड़ों या अन्य अवरोधों की समस्या कम है। वैकल्पिक रूप से आजादपुर से आईएसबीटी के बीच 9.5 किलोमीटर का सेक्शन भी पहले चरण में लिया जा सकता है, क्योंकि वहां भी निर्माण से जुड़ी बाधाएं कम बताई जा रही हैं। परियोजना की रूपरेखा प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है और अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर काम तेजी से चल रहा है। सलाहकार एजेंसी को ट्रैफिक स्टडी, इंजीनियरिंग डिजाइन, लागत अनुमान और इम्प्लीमेंटेशन स्ट्रेटेजी तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
योजना के अनुसार 55 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को छह हिस्सों में विभाजित किया गया है। इसमें आजादपुर से आईएसबीटी (9.5 किमी), आईएसबीटी से आश्रम/डीएनडी (11.5 किमी), डीएनडी से मोती बाग (10.5 किमी), मोती बाग से राजौरी गार्डन (10 किमी), राजौरी गार्डन से पीतमपुरा के पैसिफिक मॉल तक (13.5 किमी) और आउटर रिंग रोड पर चांदगीराम अखाड़ा से मजनू का टीला तक 2.5 किलोमीटर का स्पर शामिल है। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य राजधानी में ट्रैफिक दबाव कम करना और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि सलाहकार एजेंसी को इस तरह का डिजाइन तैयार करने को कहा गया है जिससे मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
55 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को छह हिस्सों में विभाजित किया गया है। परियोजना की रूपरेखा प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है और अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर पूरा होने के बाद वित्तीय स्वीकृतियां और अन्य मंजूरियां ली जाएंगी, जिसके बाद करीब छह महीने में जमीनी निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है।
योजना के अनुसार 55 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को छह हिस्सों में विभाजित किया गया है। इसमें आजादपुर से आईएसबीटी (9.5 किमी), आईएसबीटी से आश्रम/डीएनडी (11.5 किमी), डीएनडी से मोती बाग (10.5 किमी), मोती बाग से राजौरी गार्डन (10 किमी), राजौरी गार्डन से पीतमपुरा के पैसिफिक मॉल तक (13.5 किमी) और आउटर रिंग रोड पर चांदगीराम अखाड़ा से मजनू का टीला तक 2.5 किलोमीटर का स्पर शामिल है। पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य राजधानी में ट्रैफिक दबाव कम करना और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि सलाहकार एजेंसी को इस तरह का डिजाइन तैयार करने को कहा गया है जिससे मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
55 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को छह हिस्सों में विभाजित किया गया है। परियोजना की रूपरेखा प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है और अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर काम तेजी से चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर पूरा होने के बाद वित्तीय स्वीकृतियां और अन्य मंजूरियां ली जाएंगी, जिसके बाद करीब छह महीने में जमीनी निर्माण कार्य शुरू किया जा सकता है।
