30 जनवरी” त्रैमासिक पत्रिका का भागलपुर में लोकार्पण

 30 जनवरी” त्रैमासिक पत्रिका का भागलपुर में लोकार्पण

पॉलिटिकल ट्रस्ट संवाददाता।

भागलपुर (बिहार)। गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र भागलपुर के सभागार में “30 जनवरी” राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका का लोकार्पण सामूहिक रूप उपस्थित प्रबुद्ध जनों द्वारा किया गया। दिशा ग्रामीण विकास मंच बैजानी के अकादमिक पहल के अंतर्गत इस पत्रिका का प्रकाशन तत्काल सीमित वितरण हेतु किया गया। समारोह में पत्रिका प्रधान संपादक और वरिष्ठ गांधीवादी चिंतक प्रो. मनोज कुमार ने पत्रिका के शीर्षक की चर्चा करते हुए व्यक्त किया, 30 जनवरी-यह केवल एक तिथि नहीं है, यह आत्मपरीक्षण का क्षण है। यह वह दिन है जब हमने न केवल एक व्यक्ति को खोया, बल्कि संभवतः एक विचार-परंपरा को भी धीरे-धीरे हाशिए पर धकेलने की कोशिश की है। इस तिथि को पत्रिका का नाम देना दरअसल उस स्मृति को जीवित रखने का प्रयास है जो हमें झकझोरती है, असहज करती है, और हमें अपने समय से प्रश्न करने के लिए बाध्य करती है।

कहा गया, उद्देश्य गांधी का महिमामंडन करना नहीं बल्कि उनके विचारों के साथ एक ईमानदार संवाद स्थापित करना है। गांधी को ज्यों का त्यों स्वीकार करना या खारिज कर देना दोनों ही के आसान रास्ते हैं। कठिन है उन्हें समझना, उनके अंतर्विरोधों के साथ, उनके प्रयोगों के साथ और उनकी सीमाओं के साथ। “30 जनवरी” का प्रकाशन इसी कठिन रास्ते को चुनने का एक विनम्र प्रयास है। लेखक संदर्भ सहित व्यवहारिक चिंतन को पत्रिका में प्रस्तुत करने का प्रयास रहेगा।

आयोजित कार्यक्रम में गांधीवादी चिंतकों और कार्यकर्ता, पाठक शिक्षक का स्वागत करते हुए पत्रिका प्रबंध संपादक डॉ मनोज मीता द्वारा देश में विभिन्न गांधीवादी संस्थाओं की ओर से भी प्रकाशित हो रही विभिन्न पत्रिकाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हमारा प्रयास पहली बार नहीं इसके पहले भी पद्मश्री डॉ राम जी सिंह ने “गांधी ज्योति” नाम से एक पत्रिका की शुरुआत की थी। डॉ मीता द्वारा कहा गया, पत्रिका चाहे तो कोई एक आदमी भी निकाल सकता हैं लेकिन हम लोगों की कोशिश है सामूहिक प्रयास से इसका प्रकाशन हो।

परिवार विकास जमुई के भाबानंद भाई ने इस अवसर पर मानवता को झकझोरने बाला गीत प्रस्तुत किया। पूर्व कुलपति डॉ फारूक अली ने कहा, आज गांधी की वैश्विक सुकृति बढ़ रही है। विश्व गांधी के नाम से भारत को जानता है। उदय जी ने कहा कि हम गांधी क्या पक्ष रखेंगे। पत्रिका के नियमित संचालन के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी उन्होंने दिए। राजीव कांत मिश्र ने कहा, भागलपुर आजादी के मूल्यों को जिंदा रखने के लिए कृत संकल्पित है। इस दिशा में कुछ प्रयास हुए भी हैं। स्थानीय इतिहास और भ्रम जाल को तोड़ने में यह पत्रिका सफल होगी ऐसी मेरी शुभकामना है। आलोक अग्रवाल ने कहा, प्रबेशांक में दीप नारायण सिंह को स्थान देकर हम उनकी स्मृति को नई पीढ़ी के सामने रख रहे हैं। डॉ योगेंद्र ने कहा कि गांधी पर कई दिशाओं से आक्रमण किए जा रहे हैं। यह अज्ञानता का सूचक है जो गांधी को जानते नहीं गांधी को समझना नहीं चाहते वे गांधी को कटघरे में खड़ा करते हैं। प्रत्यक्ष आक्रमण का जवाब हमारे पास है लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से गांधी को पूजने वाला समुदाय अपने काम और विचार में द्वैत से इस विचार को अधिक क्षति पहुंचा रहा है।

जिला खेल पदाधिकारी अंकित रंजन ने कहा, हम अपनी संस्कृति से जुड़े होते हैं। संस्कृति हमारी पहचान है। गांधी लोक संस्कृति की बात करते थे। गांधी को लोक और लोक के गांधी को खोजने का प्रयास पत्रिका के माध्यम से हो या बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। पटना से आए सुनील झा बाल अधिकार के लिए जुझारू कार्यकर्ता ने कहा, आजादी का सबसे बड़ा मूल्य असहमति का अधिकार है संविधान विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। यह लोकतंत्र का आधार है। पत्रिका लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्य को प्रतिस्थापित करने में अग्रसर होगी। डॉ सुधीर मंडल ने कहा, रचना के माध्यम से गांधी को प्रस्तुत किया जा सकता है। गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र के अध्यक्ष प्रकाश चंद गुप्ता की अध्यक्षता की आयोजित समारोह में सभी वक्ताओं ने पत्रिका के प्रकाशन का स्वागत अभिनंदन किया इसे निरंतर प्रकाशित करते रहने का सामूहिक संकल्प भी जाहिर किया। मोहम्मद शाहबाज, संजय कुमार, डॉ सुनील अग्रवाल, कमल जायसवाल, अमर पाण्डेय, गौतम, यास्मीन बानो इत्यादि इत्यादि प्रबुद्ध जनों ने भी अपने विचार रखे।

पत्रिका कार्यकारी संपादक प्रसून लतांत द्वारा लोकार्पण समारोह का प्रभावशाली अंदाज में संचालन किया गया।