सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने के मामले में आरजेडी की प्रवक्ता सहित 4 के खिलाफ मामला दर्ज
- उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय
Political Trust
- April 15, 2026
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नोएडा। जिले की साइबर थाना पुलिस ने सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो जारी कर सार्वजनिक शांति भंग करने के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल की प्रवक्ता प्रियंका भारती सहित 4 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामला 11 अप्रैल 2026 को मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के एक पुराने वीडियो को नोएडा का बताकर प्रसारित करने से जुड़ा है। जिसमें पुलिस को एक व्यक्ति के साथ मारपीट करते हुए दिखाया था। इसके अलावा, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर सेक्टर-62 में आगजनी का एक झूठा वीडियो भी फैलाया गया था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि इस सुनियोजित साजिश का मुख्य उद्देश्य नोएडा के नागरिकों में प्रशासन के प्रति अविश्वास और भय का माहौल पैदा करना था।
साइबर क्राइम थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार, जितेंद्र कुमार दौसा ने फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया था, जो असल में मध्य प्रदेश के शहडोल जिले का था। इस वीडियो में एक व्यक्ति हंगामा कर रहा था, जिसे जितेंद्र दौसा ने “नोएडा का मजदूर” बताकर भ्रामक कैप्शन के साथ प्रचारित किया। इसका उद्देश्य लोगों को उकसाना और भ्रमित करना था।
इसी प्रकार, ‘ItsKtyni’ नामक एक्स हैंडल से नोएडा के सेक्टर-62 में आगजनी का दावा करने वाला एक वीडियो भी चलाया गया। जिसे पुलिस जांच में पूरी तरह से फर्जी पाया गया। इन भ्रामक पोस्ट्स के कारण शहर के विभिन्न हिस्सों में तनाव और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया था।
पुलिस जांच में यह सामने आया है कि यह कृत्य एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। आरोपियों ने जानबूझकर झूठी खबरें और भ्रामक वीडियो प्रसारित किए, ताकि नोएडा के नागरिकों के मन में प्रशासन के प्रति संदेह पैदा किया जा सके और कानून व्यवस्था को बिगाड़ा जा सके। इस मामले में नोएडा पुलिस के उपनिरीक्षक ने केस दर्ज कराया है और मामले की आगे की जांच जारी है।
इसी प्रकार, ‘ItsKtyni’ नामक एक्स हैंडल से नोएडा के सेक्टर-62 में आगजनी का दावा करने वाला एक वीडियो भी चलाया गया। जिसे पुलिस जांच में पूरी तरह से फर्जी पाया गया। इन भ्रामक पोस्ट्स के कारण शहर के विभिन्न हिस्सों में तनाव और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया था।
पुलिस जांच में यह सामने आया है कि यह कृत्य एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था। आरोपियों ने जानबूझकर झूठी खबरें और भ्रामक वीडियो प्रसारित किए, ताकि नोएडा के नागरिकों के मन में प्रशासन के प्रति संदेह पैदा किया जा सके और कानून व्यवस्था को बिगाड़ा जा सके। इस मामले में नोएडा पुलिस के उपनिरीक्षक ने केस दर्ज कराया है और मामले की आगे की जांच जारी है।
