अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा की

 अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्धविराम की घोषणा की
वॉशिंगटन/तेहरान। दुनिया पर मंडरा रहे तीसरे विश्वयुद्ध के खतरों के बीच एक ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता हाथ लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी स्व-घोषित ‘डेडलाइन’ खत्म होने से महज कुछ घंटे पहले ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा कर दी है। ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि अगले 14 दिनों तक ईरान पर कोई बमबारी या सैन्य हमला नहीं किया जाएगा। इस घोषणा की पुष्टि ईरानी मीडिया ने भी कर दी है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और ट्रम्प की शर्तें राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जानकारी दी कि यह फैसला पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ हुई गहन बातचीत के बाद लिया गया है। पाकिस्तानी नेतृत्व ने अमेरिका से विनाशकारी हमलों को रोकने का मानवीय अनुरोध किया था।
10 सूत्रीय प्रस्ताव: ट्रम्प ने बताया कि ईरान की ओर से एक 10-सूत्रीय व्यावहारिक प्रस्ताव मिला है, जो दीर्घकालिक शांति की दिशा में एक ठोस आधार बन सकता है। अब 10 अप्रैल को पाकिस्तान में अगले दौर की शांति वार्ता प्रस्तावित है।
विनाश की धमकी और ऐतिहासिक यू-टर्न
गौरतलब है कि बीते मंगलवार को ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान उनकी शर्तें नहीं मानता, तो “आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है।” उन्होंने ईरान के पावर प्लांट और रेल नेटवर्क को तबाह करने का खाका खींच लिया था। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव और इजरायल की सहमति के बाद, ट्रम्प ने इस सैन्य कार्रवाई को 14 दिनों के लिए टाल दिया है। वॉइट हाउस के अनुसार, इजरायल भी इस अवधि के दौरान बमबारी रोकने पर सहमत हो गया है।
UN में रूस-चीन का वीटो
इस सैन्य तनाव के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में हलचल तेज रही। होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए बहरीन द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर रूस और चीन ने वीटो कर दिया। इन देशों का तर्क था कि प्रस्ताव के कुछ हिस्से पक्षपाती हैं और इससे क्षेत्र में सैन्य अस्थिरता बढ़ सकती है। 15 सदस्यीय परिषद में 11 देशों ने समर्थन किया, जबकि पाकिस्तान और कोलंबिया अनुपस्थित रहे।
वैश्विक राहत और भविष्य की राह
फिलहाल, इस ‘सीजफायर’ से वैश्विक तेल आपूर्ति और विश्व अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा टल गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये दो हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच दशकों पुराने विवाद को सुलझाने के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति वाले होंगे। यदि 10 अप्रैल की वार्ता सफल रहती है, तो यह मध्य-पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।