वर्तमान विश्व समस्याओं से घिरा है – डॉ. शकुंतला कालरा

 वर्तमान विश्व समस्याओं से घिरा है – डॉ. शकुंतला कालरा

डॉ. सुधा शर्मा ‘पुष्प’
नई दिल्ली। वर्तमान विश्व अनेक जटिल समस्याओं के चक्रव्यूह में घिरा हुआ है, जिनमें पारिवारिक विघटन, युद्ध की विभीषिका और ऑनलाइन सुविधाओं से उत्पन्न संकट प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। इन समस्याओं का शीघ्र समाधान अत्यंत आवश्यक है।

यह विचार सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. शकुंतला कालरा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में व्यक्त किए। वह हिंदी प्रतिभा पुंज द्वारा आयोजित एक साहित्यिक गोष्ठी को संबोधित कर रही थीं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्याम लाल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य एवं प्रोफेसर हेमंत कुकरेती रहे, जबकि संचालन इंदु मिश्र ‘किरण’ ने किया।
दिल्ली के रानी बाग स्थित सुर सदन में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ दो वर्षीय अनघ शर्मा द्वारा प्रस्तुत मनमोहक ईश वंदना से हुआ।

इसके पश्चात सुरम्या शर्मा ने अपने मधुर गीत “आपके आने से, घर में कितनी रौनक है…” से उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। हिंदी प्रतिभा पुंज के अध्यक्ष प्रो. रवि शर्मा ‘मधुप’ ने सभी अतिथियों का परिचय कराया और अंगवस्त्र भेंट कर उनका सम्मान किया।

संस्था की महासचिव डॉ. सुधा शर्मा ‘पुष्प’ ने विगत कार्यक्रमों की रिपोर्ट प्रस्तुत की।
गोष्ठी में आमंत्रित वक्ताओं ने ‘पारिवारिक विघटन : समस्या और समाधान’, ‘युद्ध – क्यों/क्यों नहीं’ तथा ‘ऑनलाइन बना, मुसीबत लाइन’ जैसे समसामयिक विषयों पर अपने विचार गद्य और पद्य दोनों रूपों में व्यक्त किए।

वक्ताओं में शशिकांत शर्मा, सुनील विज, डॉ. अनुराधा अग्रवाल, डॉ. राजकुमारी शर्मा, डॉ. सुनीत कुमार, ज्योति स्वरूप गौड़, डॉ. साक्षी जोशी तथा अभिलाष शामिल रहे।

दिल्ली पुलिस के उपनिरीक्षक ज्योति स्वरूप गौड़ ने पारिवारिक संस्कारों के अभाव में बच्चों में बढ़ती हिंसात्मक प्रवृत्तियों पर चिंता जताई।

डॉ. अनुराधा अग्रवाल ने युद्ध के आम जनजीवन पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रेखांकित किया, वहीं डॉ. सुधा शर्मा ‘पुष्प’ ने अपनी कविता ‘मन के बंधन’ के माध्यम से सैनिकों की मनःस्थिति का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया।

पूर्व राजभाषा उपनिदेशक सुनील विज ने ऑनलाइन कार्य की उपयोगिता के साथ-साथ उसके दुष्प्रभावों पर भी प्रकाश डाला और अनुशासन, संयम तथा सीमित स्क्रीन-टाइम जैसे उपाय सुझाए। डॉ. राजकुमारी शर्मा ने पारिवारिक विघटन के कारणों और उसके समाधान पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन कर रहीं इंदु मिश्र ‘किरण’ ने अपनी ग़ज़ल से पारिवारिक संबंधों की मधुरता को अभिव्यक्त किया।
डॉ. सुनीत कुमार ने युद्ध के मूल में स्वार्थ को कारण बताया और परोपकार की भावना को उसका समाधान माना। शशिकांत शर्मा ने अपने गीत के माध्यम से युद्ध से बचने की आवश्यकता पर बल दिया, जबकि अभिलाष ने परिवार में माता-पिता के महत्व को भावपूर्ण प्रस्तुति से रेखांकित किया।
मुख्य अतिथि प्रो. हेमंत कुकरेती ने युद्ध के दुष्परिणामों पर आधारित अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं। प्रो. रवि शर्मा ‘मधुप’ ने अपनी कविता के माध्यम से युद्ध को मानव की मूल प्रवृत्ति बताया। अध्यक्षीय भाषण में डॉ. शकुंतला कालरा ने शक्ति की भूख और महत्त्वाकांक्षा को युद्ध का प्रमुख कारण बताया और उभरते रचनाकारों को मंच प्रदान करने के लिए हिंदी प्रतिभा पुंज की सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. रवि शर्मा ‘मधुप’ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और सभी अतिथियों को अजवायन का पौधा स्मृति चिह्न के रूप में भेंट किया। स्वादिष्ट भोजन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।