आईटीबीपी ने भारत-तिब्बत सीमा पर बनाई 29 नई चौकियां
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- March 29, 2026
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नई दिल्ली। भारत-तिब्बत सीमा ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अपनी सामरिक स्थिति को अभूतपूर्व रूप से मजबूत कर लिया है। वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से भारत ने अपनी रक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए सीमा पर 29 नई चौकियां बनाई हैं।
गृह मंत्रालय की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, अब चीनी सीमा पर भारत की कुल चौकियों की संख्या बढ़कर 209 हो गई है, जो पहले 180 थी। हिमालय की बर्फीली चोटियों पर तैनात ये नई चौकियां रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बनाई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये चौकियां पश्चिमी, मध्य और पूर्वी क्षेत्रों में 9,000 फीट से लेकर 18,750 फीट तक की भीषण ऊंचाई पर स्थित हैं। इनका विस्तार लद्दाख के सुदूर काराकोरम दर्रे से लेकर अरुणाचल प्रदेश के जाचेप ला तक है। इतनी ऊंचाई पर चौकियों की संख्या बढ़ाना चीन की किसी भी संभावित घुसपैठ को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
दिसंबर 2024 तक 4,500 से अधिक गश्त
मंत्रालय की रिपोर्ट में आंकड़ों के जरिए बताया गया है कि आईटीबीपी अब पहले से कहीं अधिक सक्रिय है। अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच हिमवीरों ने भारत-चीन सीमा पर कड़ी निगरानी रखने के लिए 4,503 गश्तें कीं। दुर्गम मौसम और ऑक्सीजन की कमी के बावजूद, इन नई चौकियों की स्थापना से गश्त की फ्रीक्वेंसी और सैनिकों के रिस्पांस टाइम में काफी सुधार आया है। सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर 24/7 नजर रखना और त्वरित जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी मजबूती
2020 की घटना के बाद केंद्र सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया है। नई बीओपी न केवल सैनिकों के रहने के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं, बल्कि इन्हें सड़क नेटवर्क और संचार प्रणालियों से भी जोड़ा गया है। सुरक्षा के रणनीतिक बदलाव के तहत 2020-21 में चौकियों की संख्या 180 थी, जिनकी संख्या 29 नई चौकियों के साथ बढ़कर 209 पर पहुँच गई है।
चीन की चुनौती और भारत का जवाब
चीन द्वारा सीमा पर गांव बसाने और इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की खबरों के बीच, भारत की यह ‘अभेद्य दीवार’ सामरिक संतुलन बनाने के लिए जरूरी थी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि आईटीबीपी की बढ़ती उपस्थिति और आधुनिक हथियारों से लैस ये नई चौकियां दुश्मन के लिए किसी भी दुस्साहस को बेहद महंगा बना देंगी।
दिसंबर 2024 तक 4,500 से अधिक गश्त
मंत्रालय की रिपोर्ट में आंकड़ों के जरिए बताया गया है कि आईटीबीपी अब पहले से कहीं अधिक सक्रिय है। अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच हिमवीरों ने भारत-चीन सीमा पर कड़ी निगरानी रखने के लिए 4,503 गश्तें कीं। दुर्गम मौसम और ऑक्सीजन की कमी के बावजूद, इन नई चौकियों की स्थापना से गश्त की फ्रीक्वेंसी और सैनिकों के रिस्पांस टाइम में काफी सुधार आया है। सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर 24/7 नजर रखना और त्वरित जवाबी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी मजबूती
2020 की घटना के बाद केंद्र सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया है। नई बीओपी न केवल सैनिकों के रहने के लिए आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं, बल्कि इन्हें सड़क नेटवर्क और संचार प्रणालियों से भी जोड़ा गया है। सुरक्षा के रणनीतिक बदलाव के तहत 2020-21 में चौकियों की संख्या 180 थी, जिनकी संख्या 29 नई चौकियों के साथ बढ़कर 209 पर पहुँच गई है।
चीन की चुनौती और भारत का जवाब
चीन द्वारा सीमा पर गांव बसाने और इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की खबरों के बीच, भारत की यह ‘अभेद्य दीवार’ सामरिक संतुलन बनाने के लिए जरूरी थी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि आईटीबीपी की बढ़ती उपस्थिति और आधुनिक हथियारों से लैस ये नई चौकियां दुश्मन के लिए किसी भी दुस्साहस को बेहद महंगा बना देंगी।
