सीधी सैन्य टक्कर की आशंका के चलते ईरान ने जुटाए 10 लाख से अधिक सैनिक, सेना में भर्ती की होड़
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- March 29, 2026
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तेहरान। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के सुलगते हालातों के बीच अब सीधी सैन्य टक्कर की आशंका गहरा गई है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका से संभावित जमीनी लड़ाई (Ground War) के लिए 10 लाख से अधिक सैनिकों का विशाल बेड़ा तैयार कर लिया है। ईरानी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, देश के युवाओं में सेना, रिवोल्यूशनरी गार्ड और ‘बसीज’ फोर्स में शामिल होने के लिए जबरदस्त होड़ मची हुई है।
युवाओं में सेना भर्ती का जुनून
ईरान को अंदेशा है कि अमेरिका उस पर जमीनी हमला कर सकता है। इस खतरे को देखते हुए ईरान ने अपनी सैन्य लामबंदी तेज कर दी है। हाल के दिनों में रिकॉर्ड संख्या में ईरानी युवाओं ने स्वेच्छा से बसीज और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में भर्ती के लिए आवेदन किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपनी ‘ग्राउंड फोर्स’ को मजबूत कर अमेरिका को कड़ा संदेश देना चाहता है कि उसकी धरती पर कदम रखना आसान नहीं होगा।
दूसरी ओर अमेरिका भी अपनी सैन्य शक्ति को और अधिक धार देने में जुट गया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग मिडिल ईस्ट में 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस नई टुकड़ी में पैदल सेना (Infantry) और भारी बख्तरबंद गाड़ियां शामिल होंगी। ये सैनिक पहले से तैनात 5,000 मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 2,000 पैराट्रूपर्स के साथ मिलकर अमेरिकी मोर्चे को मजबूती देंगे।
“ईरान ने दिए 10 तेल टैंकर गिफ्ट”
इन युद्धस्तर की तैयारियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक हैरान करने वाला खुलासा किया है। व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने सद्भावना दिखाते हुए 10 तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है।
कूटनीति बनाम युद्ध
जहाँ एक तरफ सीमाओं पर टैंक और तोपें तैनात हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ तेल टैंकरों के जरिए कूटनीतिक संदेश भी भेजे जा रहे हैं। हालांकि, 10 लाख ईरानी सैनिकों की तैयारी और अमेरिका की अतिरिक्त सैन्य तैनाती ने दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
ईरान को अंदेशा है कि अमेरिका उस पर जमीनी हमला कर सकता है। इस खतरे को देखते हुए ईरान ने अपनी सैन्य लामबंदी तेज कर दी है। हाल के दिनों में रिकॉर्ड संख्या में ईरानी युवाओं ने स्वेच्छा से बसीज और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में भर्ती के लिए आवेदन किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपनी ‘ग्राउंड फोर्स’ को मजबूत कर अमेरिका को कड़ा संदेश देना चाहता है कि उसकी धरती पर कदम रखना आसान नहीं होगा।
दूसरी ओर अमेरिका भी अपनी सैन्य शक्ति को और अधिक धार देने में जुट गया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग मिडिल ईस्ट में 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस नई टुकड़ी में पैदल सेना (Infantry) और भारी बख्तरबंद गाड़ियां शामिल होंगी। ये सैनिक पहले से तैनात 5,000 मरीन और 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के 2,000 पैराट्रूपर्स के साथ मिलकर अमेरिकी मोर्चे को मजबूती देंगे।
“ईरान ने दिए 10 तेल टैंकर गिफ्ट”
इन युद्धस्तर की तैयारियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक हैरान करने वाला खुलासा किया है। व्हाइट हाउस में कैबिनेट बैठक के दौरान ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान ने सद्भावना दिखाते हुए 10 तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति दी है।
कूटनीति बनाम युद्ध
जहाँ एक तरफ सीमाओं पर टैंक और तोपें तैनात हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ तेल टैंकरों के जरिए कूटनीतिक संदेश भी भेजे जा रहे हैं। हालांकि, 10 लाख ईरानी सैनिकों की तैयारी और अमेरिका की अतिरिक्त सैन्य तैनाती ने दुनिया भर की चिंताएं बढ़ा दी हैं। यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
