यूएनजीए के शांति प्रस्ताव पर भारत ने तटस्थ रुख स्पष्ट किया
- राष्ट्रीय विदेश
Political Trust
- February 26, 2026
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मास्को। रूस-यूक्रेन संघर्ष के चार वर्ष पूरे होने पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में लाए गए शांति प्रस्ताव पर भारत ने एक बार फिर अपना स्वतंत्र और तटस्थ रुख स्पष्ट किया है। मंगलवार (24 फरवरी) को महासभा में यूक्रेन द्वारा प्रस्तुत स्थायी शांति के समर्थन वाले मसौदे पर मतदान के दौरान भारत ने हिस्सा नहीं लिया। 193 सदस्यीय महासभा में इस प्रस्ताव को 107 देशों के समर्थन के साथ अपनाया गया, जबकि भारत, चीन, ब्राजील और यूएई सहित 51 देशों ने मतदान से दूरी बनाए रखी।
51 देश मतदान में नहीं लेंगे भाग
‘यूक्रेन में स्थायी शांति के समर्थन’ शीर्षक वाला यह प्रस्ताव रूसी हमले की चौथी वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया गया। 193 सदस्यीय महासभा में हुए मतदान में 107 देशों ने इसके पक्ष में वोट दिया, 12 ने विरोध किया, जबकि 51 देशों ने मतदान से परहेज किया।
भारत सहित इन देशों ने बनाई दूरी
भारत उन 51 देशों में शामिल रहा जिन्होंने मतदान से दूरी बनाई। प्रस्ताव को कीव द्वारा पेश किया गया था। भारत के अलावा बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका भी मतदान से परहेज करने वालों में शामिल थे। प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप न्यायसंगत, व्यापक और स्थायी शांति की अपील दोहराई गई। साथ ही युद्धबंदियों की पूर्ण अदला-बदली, अवैध रूप से हिरासत में रखे गए लोगों की रिहाई और जबरन स्थानांतरित या निर्वासित किए गए नागरिकों-विशेषकर बच्चों की वापसी को विश्वास-निर्माण उपाय बताया गया।
‘यूक्रेन में स्थायी शांति के समर्थन’ शीर्षक वाला यह प्रस्ताव रूसी हमले की चौथी वर्षगांठ पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किया गया। 193 सदस्यीय महासभा में हुए मतदान में 107 देशों ने इसके पक्ष में वोट दिया, 12 ने विरोध किया, जबकि 51 देशों ने मतदान से परहेज किया।
भारत सहित इन देशों ने बनाई दूरी
भारत उन 51 देशों में शामिल रहा जिन्होंने मतदान से दूरी बनाई। प्रस्ताव को कीव द्वारा पेश किया गया था। भारत के अलावा बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका भी मतदान से परहेज करने वालों में शामिल थे। प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप न्यायसंगत, व्यापक और स्थायी शांति की अपील दोहराई गई। साथ ही युद्धबंदियों की पूर्ण अदला-बदली, अवैध रूप से हिरासत में रखे गए लोगों की रिहाई और जबरन स्थानांतरित या निर्वासित किए गए नागरिकों-विशेषकर बच्चों की वापसी को विश्वास-निर्माण उपाय बताया गया।
