विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘ग्रीन अर्थ, हेल्दी लाइफ, सिक्योर फ्यूचर’ सेमिनार आयोजित

 विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘ग्रीन अर्थ, हेल्दी लाइफ, सिक्योर फ्यूचर’ सेमिनार आयोजित

पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे और ओएनजीसी के चीफ स्किल डेवलपमेंट ऑफिसर ने युवाओं से किया हरित क्रांति का आह्वान
डॉ. के.सी. पांडेय
नई दिल्ली। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पॉलिटिकल ट्रस्ट पत्रिका द्वारा प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली में “Green Earth, Healthy Life, Secure Future” विषय पर एक भव्य एवं विचारोत्तेजक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और जनभागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों एवं गणमान्य अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे, ओएनजीसी के चीफ स्किल डेवलपमेंट ऑफिसर अनिल कुमार बहुगुणा, आईसीएआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर.एस. बाना, रोलर स्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष तुलसी राम अग्रवाल, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के निदेशक संजीत कुमार, भाजपा प्रवक्ता विनीता हरीहरन, ओएनजीसी के डीजीएम (एचआर) अमरदीप सिंह, निम्मी ठाकुर और अमर चंद द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन नीरज बावरी ने किया।

 

अपने संबोधन में अनिल कुमार बहुगुणा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल चर्चा नहीं, बल्कि धरातल पर कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी कार्बन उत्सर्जन कम करने और वर्ष 2038 तक नेट जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने युवाओं से जल संरक्षण, प्लास्टिक का उपयोग कम करने तथा विभिन्न कौशल विकास एवं इंटर्नशिप योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया।

 

विनीता हरीहरन ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस आत्मनिरीक्षण का अवसर है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए वैज्ञानिकों से प्रदूषण नियंत्रण हेतु ठोस रोडमैप तैयार करने और आम नागरिकों से सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ाने की अपील की।

तुलसी राम अग्रवाल ने कहा कि पृथ्वी पर सभी जीव-जंतुओं और वनस्पतियों का समान अधिकार है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय असंतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन पर चिंता व्यक्त करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

 

संजीत कुमार ने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रकृति मनुष्य की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, लेकिन उसके लालच को नहीं। उन्होंने जल संरक्षण, सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक और सार्वजनिक परिवहन के अधिक उपयोग पर जोर दिया।

 

डॉ. आर.एस. बाना ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी है और भारत वर्ष 2070 तक नेट जीरो एमिशन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड वैभव कुमार मिश्रा रहे
समाजसेविका काजल चौधरी तथा अमर संदेश समाचार पत्र के संपादक अमरचंद ने भी अपने विचार रखे। वैभव कुमार मिश्रा ने पर्यावरण संरक्षण को प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बताते हुए व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास करने की अपील की। अमरचंद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और समाज के हर वर्ग को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
समाजसेविका काजल चौधरी ने जमीनी स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल चर्चा से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत प्रयासों से बदलाव संभव है। उन्होंने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान का संदेश देते हुए प्रत्येक नागरिक से कम से कम एक पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने की अपील की।

मुख्य अतिथि अश्विनी कुमार चौबे ने भारतीय संस्कृति में प्रकृति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि “प्रकृति रक्षति रक्षिता” केवल एक मंत्र नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का परिणाम आज विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने युवाओं, पत्रकारों और समाज के सभी वर्गों से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।

उन्होंने ‘पॉलिटिकल ट्रस्ट पत्रिका’ की टीम की सराहना करते हुए “प्रकृति रक्षति रक्षिता” का मूल मंत्र दिया और कड़े शब्दों में आगाह किया कि यदि आप प्रकृति को छेड़ोगे, तो प्रकृति आपको कभी छोड़ेगी नहीं; आज उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर-पूर्वी राज्यों और दिल्ली में आने वाली आपदाएं इसी मानवीय हस्तक्षेप का दुष्परिणाम हैं। उन्होंने ‘नील गगन के तले, धरती का प्यार पले’ गीत और बचपन की कहानियों को याद करते हुए नई पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सभी पत्रकार मित्रों, मातृशक्ति और युवा शक्ति को पर्यावरण की रक्षा के लिए एक दृढ़ संकल्प लेने का आह्वान किया।

 

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए विश्व युवक केंद्र (Vishwa Yuvak Kendra), सायक सरकार, भूषण कुमार, प्रीतीश अंबोरे, आशना सेठी, अंकित कुमार यादव, रजनी त्यागी एवं काजल चौधरी को ‘प्रकृति मित्र सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त सुधा झा, किरण झा, कल्पना झा, नीरा झा, कल्पना पाठक, वंदना झा एवं सांत्वना मिश्रा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अनेक लोगों को भी सम्मानित किया गया।

 

कार्यक्रम के अंत में मुख्य आयोजक निम्मी ठाकुर ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले गेल इंडिया लिमिटेड, ओएनजीसी तथा ऑयल इंडिया लिमिटेड सहित सभी सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों, शिक्षाविदों, युवाओं और मीडिया प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही। सेमिनार ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और सामूहिक जिम्मेदारी के भाव को मजबूत करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।

http://Politicaltrust.in