सुप्रीम कोर्ट का सवाल?क्या भाजपा के मुख्यमंत्री देते हैं हेट स्पीच, याचिका पर सुनवाई से इनकार
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- February 18, 2026
- 0
- 36
- 1 minute read
नई दिल्ली। हेट स्पीच के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से साफ इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि याचिका कुछ खास लोगों को निशाना बनाते दिख रही है और याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। पीठ ने नई याचिका दायर करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा दायर एक जनहित याचिका की कड़ी आलोचना की और यह कहकर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया कि यह भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निशाना बनाती है। याचिका में सांविधानिक अधिकारियों के उन बयानों और टिप्पणियों को नियंत्रित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी, जो सांविधानिक मर्यादा के अनुरूप नहीं माने जाते।
अदालत में क्या हुआ और पीठ ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि उठाया गया मुद्दा गंभीर है, लेकिन याचिका अपने मौजूदा रूप में कुछ खास व्यक्तियों को ही निशाना बनाती हुई दिख रही है। अदालत ने यह भी कहा कि वह ऐसी किसी याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकती जिससे यह लगे कि मामला किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ है।
याचिका में हिमंत बिस्वा सरमा, पुष्कर सिंह धामी, योगी आदित्यनाथ और नितेश राणे सहित कुछ नेताओं के बयानों का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि उन्होंने शोध के दौरान करीब 30 आपत्तिजनक सार्वजनिक बयानों की पहचान की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है। उन्होंने दलील दी कि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और अदालत को इस पर कुछ ठोस कदम उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं है। पीठ ने टिप्पणी की कि याचिका में कुछ लोगों का चयन किया गया है, जबकि अन्य को नजरअंदाज किया गया है, जो उचित नहीं है। अदालत ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता मौजूदा याचिका वापस लेकर केवल सांविधानिक सिद्धांतों पर केंद्रित नई याचिका दाखिल करें और यह सुनिश्चित करें कि वह किसी विशेष व्यक्ति या दल के खिलाफ न लगे।
अदालत में क्या हुआ और पीठ ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि उठाया गया मुद्दा गंभीर है, लेकिन याचिका अपने मौजूदा रूप में कुछ खास व्यक्तियों को ही निशाना बनाती हुई दिख रही है। अदालत ने यह भी कहा कि वह ऐसी किसी याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकती जिससे यह लगे कि मामला किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक दल के खिलाफ है।
याचिका में हिमंत बिस्वा सरमा, पुष्कर सिंह धामी, योगी आदित्यनाथ और नितेश राणे सहित कुछ नेताओं के बयानों का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ताओं का दावा था कि उन्होंने शोध के दौरान करीब 30 आपत्तिजनक सार्वजनिक बयानों की पहचान की है। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि इस मामले में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत है। उन्होंने दलील दी कि स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है और अदालत को इस पर कुछ ठोस कदम उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं है। पीठ ने टिप्पणी की कि याचिका में कुछ लोगों का चयन किया गया है, जबकि अन्य को नजरअंदाज किया गया है, जो उचित नहीं है। अदालत ने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता मौजूदा याचिका वापस लेकर केवल सांविधानिक सिद्धांतों पर केंद्रित नई याचिका दाखिल करें और यह सुनिश्चित करें कि वह किसी विशेष व्यक्ति या दल के खिलाफ न लगे।
