सत्ता सुख नहीं, किसानों की सेवा ही सर्वोपरि – राज्य सभा में बोले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

 सत्ता सुख नहीं, किसानों की सेवा ही सर्वोपरि – राज्य सभा में बोले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली, 13 फरवरी 2026। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सभा में कहा कि केंद्र सरकार सत्ता का आनंद लेने के लिए नहीं, बल्कि किसान, गांव और गरीब के समग्र विकास के उद्देश्य से कार्य कर रही है। उन्होंने किसान को देश का जीवनदाता बताते हुए कहा कि सरकार की नीतियों का केंद्र बिंदु खेती को लाभकारी बनाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
मंत्री ने बताया कि कृषि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। देशभर में कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस, प्रोसेसिंग यूनिट और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं, जिससे फसलों के भंडारण की क्षमता बढ़ी है और नुकसान में कमी आई है। इससे किसानों को अपनी उपज बेहतर कीमत पर बेचने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर कहा कि लागत पर लाभ जोड़कर MSP निर्धारित करने की नीति से किसानों को सुरक्षा मिली है। दलहन उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सरकार ने तुअर, मसूर और उड़द की पूरी खरीद सुनिश्चित करने की व्यवस्था की है और भुगतान सीधे किसानों के खातों में भेजा जा रहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश को दलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्नत बीज, प्रशिक्षण, अनुदान और प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत दाल उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सकता है।
पराली प्रबंधन के विषय में उन्होंने कहा कि केवल किसानों को दोषी ठहराना उचित नहीं है। सरकार ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनों पर सब्सिडी, कस्टम हायरिंग सेंटर और वैकल्पिक उपयोग की योजनाएं लागू की हैं, जिससे पराली को संसाधन में बदला जा सके। कई राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि गेहूं और चावल उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के बाद अब फसल विविधीकरण, जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि पर ध्यान दिया जा रहा है। दलहन, तिलहन और मोटे अनाज को प्रोत्साहन देकर खेती को संतुलित और लाभकारी बनाया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि सरकार की सोच किसान को केवल अन्नदाता तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसे ऊर्जा और समृद्धि का स्रोत मानती है। ग्रामीण विकास, कृषि निवेश और समर्थन मूल्य की नीतियां मिलकर किसानों को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।