राजनीतिक आरोपों के बीच केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने रखा रिकॉर्ड पर सच, बोले- सब कुछ सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध
पॉलिटिकल ट्रस्ट मैगजीन – नई दिल्ली
एपस्टीन फाइल्स को लेकर संसद और राजनीतिक हलकों में चल रही बहस के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आरोपों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने स्पष्ट किया कि जेफरी एपस्टीन से उनकी मुलाकातें पूरी तरह पेशेवर और औपचारिक थीं, जिनका किसी भी आपराधिक मामले या विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संसद सत्र के दौरान एपस्टीन फाइल्स के संदर्भ में उनका नाम लिए जाने के बाद उन्होंने तथ्यों को सार्वजनिक करना जरूरी समझा। उन्होंने बताया कि मई 2009 में न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी प्रतिनिधि बनने से लेकर 2017 में केंद्रीय मंत्री बनने तक की अवधि से जुड़े करीब 30 लाख ईमेल सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं, जिनमें केवल तीन-चार बैठकों का ही उल्लेख मिलता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ये मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इंडिपेंडेंट कमीशन ऑन मल्टीलेटरलिज़्म और अन्य वैश्विक विषयों पर हुई औपचारिक चर्चाओं का हिस्सा थीं। मंत्री ने यह भी बताया कि कुछ अवसरों पर वे अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में एपस्टीन से मिले थे, जहां कई देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
मीडिया को संबोधित करते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि सीमित ईमेल संवाद वैश्विक सहयोग, निवेश और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे विषयों तक ही सीमित था और इनका एपस्टीन पर लगे आपराधिक आरोपों से कोई संबंध नहीं रहा।
राहुल गांधी पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिना तथ्य के आरोप लगाना राजनीतिक जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि देश ने बीते वर्षों में मजबूत आर्थिक प्रगति की है और भारत आज विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जो शीघ्र ही तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव और आर्थिक नीतियों पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा वैश्विक व्यापार से जुड़ा है और हाल के वर्षों में कई अहम व्यापार समझौते राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर किए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में तथ्यों, पारदर्शिता और जिम्मेदारी का विशेष महत्व है। निराधार आरोप न तो लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत करते हैं और न ही जनहित की सेवा करते हैं।
