कालाष्टमी पर दुर्लभ शिववास योग, इन उपायों से दूर होंगे कष्ट
- दिल्ली राष्ट्रीय हमारी संस्कृति
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- February 9, 2026
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नई दिल्ली। कालाष्टमी का दिन भगवान शिव के रौद्र रूप, भगवान कालभैरव को समर्पित है। इस बार फाल्गुन माह की कालाष्टमी बेहद खास है, क्योंकि इस दिन शिववास योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस योग में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है।
सनातन धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन से भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। कालाष्टमी पर दुर्लभ शिववास योग का संयोग बनने से इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है।
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 09 फरवरी 2026 को सुबह 05 बजकर 01 मिनट से शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन 10 फरवरी 2026 को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर होगा। कालाष्टमी पर निशा काल में कालभैरव देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इसलिए इस बार कालाष्टमी का व्रत 09 फरवरी को रखा जाएगा।
क्या है शिववास योग?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कालाष्टमी के दिन भगवान शिव की विशेष ऊर्जा पृथ्वी पर सक्रिय मानी जाती है, तब शिववास योग बनता है। इस योग में भगवान शिव और कालभैरव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के संकट कम होते हैं। मान्यता है कि इस योग में की गई साधना और उपाय जल्दी फल देते हैं तथा शत्रु बाधा, भय और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
कालाष्टमी की पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, फिर घर के मंदिर या कालभैरव मंदिर में दीपक जलाएं. भगवान कालभैरव को सरसों का तेल, काले तिल, नारियल और फूल अर्पित करें। भैरव चालीसा और कालभैरव अष्टक का पाठ करें। निशा काल यानी रात के समय विशेष रूप से कालभैरव की पूजा करें। पूजा के बाद गरीबों या जरूरतमंदों को भोजन या दान जरूर दें।
कालाष्टमी पर करें ये खास उपाय
कालभैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
काले कुत्ते को रोटी या मीठी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। काले तिल का दान करने से शनि दोष और नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करने से भय और संकट दूर होते हैं।
कालाष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी का व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सुरक्षा और सफलता प्राप्त होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो मानसिक तनाव, शत्रु बाधा या आर्थिक समस्याओं से परेशान हैं। कालभैरव की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भय से मुक्ति मिलती है। इसलिए कालाष्टमी का दिन भगवान कालभैरव की कृपा प्राप्त करने और जीवन की परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। श्रद्धा और नियम के साथ की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि ला सकती है।
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 09 फरवरी 2026 को सुबह 05 बजकर 01 मिनट से शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन 10 फरवरी 2026 को सुबह 07 बजकर 27 मिनट पर होगा। कालाष्टमी पर निशा काल में कालभैरव देव की पूजा का विशेष महत्व होता है। इसलिए इस बार कालाष्टमी का व्रत 09 फरवरी को रखा जाएगा।
क्या है शिववास योग?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कालाष्टमी के दिन भगवान शिव की विशेष ऊर्जा पृथ्वी पर सक्रिय मानी जाती है, तब शिववास योग बनता है। इस योग में भगवान शिव और कालभैरव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन के संकट कम होते हैं। मान्यता है कि इस योग में की गई साधना और उपाय जल्दी फल देते हैं तथा शत्रु बाधा, भय और आर्थिक परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
कालाष्टमी की पूजा विधि
कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, फिर घर के मंदिर या कालभैरव मंदिर में दीपक जलाएं. भगवान कालभैरव को सरसों का तेल, काले तिल, नारियल और फूल अर्पित करें। भैरव चालीसा और कालभैरव अष्टक का पाठ करें। निशा काल यानी रात के समय विशेष रूप से कालभैरव की पूजा करें। पूजा के बाद गरीबों या जरूरतमंदों को भोजन या दान जरूर दें।
कालाष्टमी पर करें ये खास उपाय
कालभैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
काले कुत्ते को रोटी या मीठी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। काले तिल का दान करने से शनि दोष और नकारात्मक ऊर्जा कम होती है।
ॐ कालभैरवाय नमः मंत्र का जाप करने से भय और संकट दूर होते हैं।
कालाष्टमी व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी का व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सुरक्षा और सफलता प्राप्त होती है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो मानसिक तनाव, शत्रु बाधा या आर्थिक समस्याओं से परेशान हैं। कालभैरव की कृपा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भय से मुक्ति मिलती है। इसलिए कालाष्टमी का दिन भगवान कालभैरव की कृपा प्राप्त करने और जीवन की परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। श्रद्धा और नियम के साथ की गई पूजा व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि ला सकती है।
