नितिन गडकरी बोले 2027 तक बदलेगी देश की सड़कों की सूरत

 नितिन गडकरी बोले 2027 तक बदलेगी देश की सड़कों की सूरत
नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार परिसंपत्ति मुद्रीकरण के लिए टोल-ऑपरेट-ट्रांसफर (टीओटी) मॉडल से आगे बढ़कर इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट) की ओर देख रही है। इसलिए इस क्षेत्र में तेजी से पारदर्शी फैसले लेने के लिए नई नीतियां बनाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचा अर्थव्यवस्था के विकास की कुंजी है। इसलिए अच्छा बुनियादी ढांचा बनाने के लिए ज्यादा खर्च कैसे किया जाए और ज्यादा सड़कें, एक्सप्रेसवे और सुरंगें कैसे बनाई जाएं, यह पहला महत्त्वपूर्ण एजेंडा है। और इसमें बहुत बड़ी संभावना है। वाहन क्षेत्र में वृद्धि को देखते हुए हमें स्वाभाविक रूप से ज्यादा और बेहतर सड़कों की जरूरत है।
लॉजिस्टिक्स लागत कम में अब तक किस तरह की प्रगति की है इस पर उनका कहना था कि सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए सर्वाधिक जरूरी चीज लॉजिस्टिक लागत है। भारत में लॉजिस्टिक लागत पहले 16 फीसदी थी।  आईआईएम बेंगलूरु और आईआईटी मद्रास के नवीनतम शोध से पता चलता है कि अच्छी सड़कों की वजह से अब लॉजिस्टिक लागत 5-6 फीसदी तक कम हो गई है। यह बड़ी सफलता है।
हमारा उद्देश्य सीएनजी, एलएनजी, इलेक्ट्रिक या हाइड्रोजन और फ्लेक्स फ्यूल इंजन पर ध्यान देकर लागत कम करना है। चीन में लॉजिस्टिक की लागत 8 फीसदी है और यूरोपीय देशों में यह 12 फीसदी है। हम सभी का मिशन यह है कि इस मामले में हम कम से कम चीन के बराबर हों, तभी हम निर्यात के नजरिये से दुनिया के बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो पाएंगे।
परियोजना आवंटन प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि अब विभाग 1,000 करोड़ रुपये तक की लागत की परियोजना को अपने आप मंजूर कर सकता है। मगर 70 से 80 फीसदी परियोजना की लागत 3,000-4,000 करोड़ रुपये होती है। ज्यादातर को मंजूरी के लिए मंत्रिमंडल के पास भेजा जाता है। इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लग जाता है।