सुप्रीम कोर्ट में पहुंचीं सीएम ममता, कहा…SIR के निशाने पर बंगाल
- दिल्ली राजनीति राष्ट्रीय
Political Trust
- February 5, 2026
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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में एसआईआर के खिलाफ आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सीएम ममता बनर्जी कोर्ट में मौजूद रहीं। यह पहली बार है जब किसी राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री मौखिक दलीलें देने के लिए खुद सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हुईं। सुप्रीम कोर्ट में आज पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वकीलों के बीच मौजूद थी। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें पश्चिम बंगाल के अपने दो साथी न्यायाधीशों से जानकारी मिली, जिन्होंने पास प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया समझाई और इसी समझ के आधार पर इस मुद्दे को शामिल किया गया। मामले में सीएम ममता बनर्जी का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि न्यायालय ने पहले तार्किक विसंगतियों की सूची प्रदर्शित करने का निर्देश दिया था। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि न्यायालय को सूचित किया गया था कि सूची संचार का एकमात्र माध्यम नहीं है और संबंधित व्यक्तियों को व्यक्तिगत नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं।
32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं बंगाल में
अधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय से याचिकाकर्ता के संक्षिप्त नोट पर विचार करने का आग्रह किया और बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल चार दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम तार्किक विसंगति सूची में हैं, और 63 लाख मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जो संविधान के तहत परिकल्पित श्रेणी नहीं है। दीवान ने आगे कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र सहित कई स्वीकृत दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि बंगाल में श्री द्विवेदी का उच्चारण ‘दिबेदी’ होगा, और बताया कि बंगाली भाषा में ‘वा’ की ध्वनि नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दिया कि कम से कम उनके नाम का उच्चारण तो सही होगा, जिस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीच में ही टोकते हुए कहा कि ऐसा नहीं होगा। वहीं सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि नाम संबंधी विसंगतियों के कारण सीमित समय का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो रहा है और मतदाताओं को गंभीर असुविधा हो रही है। मुख्य न्यायाधीश ने भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी से पूछा कि कुछ विसंगतियां स्थानीय बोलियों और उच्चारण में भिन्नता के कारण उत्पन्न होती हैं और इस तरह की समस्याएं पूरे देश में होती हैं।
इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह ठोस उदाहरण दे रही हैं और प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरें भी दिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण देते हुए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जब कोई बेटी शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो सवाल उठते हैं कि वह अपने पति का उपनाम क्यों इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार, ऐसी कई महिलाओं के नाम एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि फ्लैट खरीदने या निवास स्थान बदलने वाले गरीब लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं। सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के बावजूद, अधिकारी ऐसे मामलों को ‘गलत मानचित्रण’ बताकर अदालत के पूर्व निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं।
अधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय से याचिकाकर्ता के संक्षिप्त नोट पर विचार करने का आग्रह किया और बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए केवल चार दिन शेष हैं। उन्होंने कहा कि 32 लाख मतदाता सूचीबद्ध नहीं हैं, 1.36 करोड़ नाम तार्किक विसंगति सूची में हैं, और 63 लाख मामलों की सुनवाई अभी लंबित है। उन्होंने यह भी बताया कि 8,300 सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जो संविधान के तहत परिकल्पित श्रेणी नहीं है। दीवान ने आगे कहा कि निवास प्रमाण पत्र, आधार और ओबीसी प्रमाण पत्र सहित कई स्वीकृत दस्तावेजों को अस्वीकार किया जा रहा है, जिससे लोगों को चार से पांच घंटे तक कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने टिप्पणी की कि बंगाल में श्री द्विवेदी का उच्चारण ‘दिबेदी’ होगा, और बताया कि बंगाली भाषा में ‘वा’ की ध्वनि नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दिया कि कम से कम उनके नाम का उच्चारण तो सही होगा, जिस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीच में ही टोकते हुए कहा कि ऐसा नहीं होगा। वहीं सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने बताया कि नाम संबंधी विसंगतियों के कारण सीमित समय का एक बड़ा हिस्सा बर्बाद हो रहा है और मतदाताओं को गंभीर असुविधा हो रही है। मुख्य न्यायाधीश ने भारत निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी से पूछा कि कुछ विसंगतियां स्थानीय बोलियों और उच्चारण में भिन्नता के कारण उत्पन्न होती हैं और इस तरह की समस्याएं पूरे देश में होती हैं।
इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह ठोस उदाहरण दे रही हैं और प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित तस्वीरें भी दिखा सकती हैं। उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया का उपयोग केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उदाहरण देते हुए, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जब कोई बेटी शादी के बाद अपने ससुराल जाती है, तो सवाल उठते हैं कि वह अपने पति का उपनाम क्यों इस्तेमाल कर रही है। उनके अनुसार, ऐसी कई महिलाओं के नाम एकतरफा तरीके से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि फ्लैट खरीदने या निवास स्थान बदलने वाले गरीब लोगों के नाम भी हटाए जा रहे हैं। सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इन परिस्थितियों के बावजूद, अधिकारी ऐसे मामलों को ‘गलत मानचित्रण’ बताकर अदालत के पूर्व निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं।
