हाईकोर्ट ने रद्द की दुष्कर्म की एफआईआर, खंडपीठ ने कहा…आपसी सहमति से बने संबंध धोखाधड़ी नहीं  

 हाईकोर्ट ने रद्द की दुष्कर्म की एफआईआर, खंडपीठ ने कहा…आपसी सहमति से बने संबंध धोखाधड़ी नहीं  
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि आपसी सहमति से बने फिजिकल रिलेशन को शादी का झूठा वादा मानकर धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने इस संबंध में दर्ज FIR को रद्द कर दिया है। खंडपीठ जज सिद्धार्थ वर्मा और जज अब्दुल शाहिद ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि रिश्ता टूट जाता है, तो यह केवल निराशा है, अपराध नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय दंड संहिता की धारा-69 केवल उन मामलों को दंडित करती है, जहां शुरू से ही शादी का झूठा वादा करके धोखाधड़ी की गई हो। इस धारा में दोष साबित होने पर अधिकतम दस साल की सजा का प्रावधान है।
मामला नोएडा का है, जहां 12 दिसंबर 2024 को एक युवती ने सेक्टर-63 थाने में युवक पर धमकाने, हमला करने और शादी का झूठा वादा करके रिलेशन बनाने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी। आरोपी युवक ने FIR रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
युवक के वकील ने कोर्ट को बताया कि दोनों की पहले दोस्ती हुई थी और जून 2023 में सगाई हुई। शादी की डेट 12 नवंबर 2024 तय हुई थी और परिवार ने तैयारियां शुरू कर दी थीं। कोर्ट ने पाया कि याची की तरफ से शादी की वास्तविक तैयारी की गई थी और रिश्ता टूटने के कारण इसे धोखाधड़ी नहीं माना जा सकता।
कोर्ट ने FIR रद्द करते हुए कहा कि धारा-69 केवल तब लागू होती है जब शुरू से ही शादी का कोई इरादा न हो और झूठा वादा किया गया हो। हालांकि धमकाने और हमले के अन्य आरोपों की जांच जारी रहेगी।