तमिलनाडु में एनडीए के लिए वोटों का गणित सबसे अहम, शाह-पलानीसामी के बीच मंथन
निम्मी ठाकुर, नई दिल्ली।
तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनाव में जीत की कुंजी वोटों के सटीक अंकगणित को माना जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए अन्नाद्रमुक महासचिव ई. पलानीसामी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच दिल्ली में लंबी और अहम बैठक हुई। चर्चा का फोकस आपसी टकराव से ऊपर उठकर सीटों की संख्या के बजाय जीत का बेहतर “स्ट्राइक रेट” सुनिश्चित करने पर रहा।
सूत्रों के अनुसार, बुधवार देर रात हुई इस मुलाकात में 2021 के विधानसभा चुनाव के जिलेवार नतीजों और वोट शेयर का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। बातचीत में यह सामने आया कि कई जिलों में एनडीए और डीएमके गठबंधन के बीच वोटों का अंतर बेहद कम था, जबकि गैर-गठबंधन दलों ने निर्णायक वोट हासिल कर लिए।
उदाहरण के तौर पर वेल्लौर जिले में पांच में से चार सीटें डीएमके ने जीतीं, जबकि दोनों प्रमुख गठबंधनों के बीच वोट शेयर का अंतर महज 2 प्रतिशत था और करीब 6 प्रतिशत वोट अन्य दलों को मिले। इसी तरह नागपट्टिनम में 3 प्रतिशत के अंतर के बावजूद अन्य दलों को 10 प्रतिशत वोट मिले। अरियालुर में भी 4 प्रतिशत से कम का अंतर रहा, जहां 7 प्रतिशत वोट गैर-गठबंधन दलों के खाते में गए। कन्याकुमारी, टेनकासी, विल्लुपुरम, चेंगलपट्टु, मदुरै, रानीपेट और शिवगंगा जैसे जिलों को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, पिछले चुनाव में डीएमके गठबंधन ने 42 ऐसी सीटें जीती थीं, जहां जीत का अंतर 5 प्रतिशत से भी कम था और इन सीटों पर अन्य दलों को 7 से 24 प्रतिशत तक वोट मिले थे। उस समय इन दलों को साथ लाने को लेकर एनडीए में एक राय नहीं बन पाई थी, मुख्य वजह सीटों की हिस्सेदारी पर असहमति रही।
अब भाजपा नेतृत्व का मानना है कि यदि ये दल मौजूदा सरकार के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं, तो उन्हें एनडीए के साथ लाना रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है। इसके साथ ही यह भी जरूरी माना जा रहा है कि गठबंधन के भीतर नेताओं की आपसी कलह या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा चुनावी गणित को नुकसान न पहुंचाए।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में एनडीए की रणनीति “हर वोट जोड़ने” पर केंद्रित होगी, ताकि छोटे दलों और विरोधी वोटों को एक मंच पर लाकर चुनावी बढ़त हासिल की जा सके।
