बजट में शेयर ट्रेडर्स को झटका, ट्रेडिंग होगी महंगी इतना पड़ेगा असर

 बजट में शेयर ट्रेडर्स को झटका, ट्रेडिंग होगी महंगी इतना पड़ेगा असर
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 से शेयर बाजार को बड़ी राहत नहीं मिली है। बजट में शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए एक घोषणा की गई है।इससे ट्रेडर्स-निवेशकों को झटका लगा है। बजट प्रस्तावों के तहत फ्यूचर और ऑप्शन दोनों पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाने का फैसला लिया गया है। यानी अब ट्रेडर्स को शेयर बाजार के सौदे पर पहले के मुकाबले पर दोगुना से ज्यादा टैक्स देना होगा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट प्रस्तावों के अनुसार फ्यूचर्स पर एसटीटी की दर में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। अब फ्यूचर्स पर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है, यानी अब ट्रेडर्स को पहले के मुकाबले डेढ़ गुना टैक्स देना होगा। वहीं वित्त मंत्री ने ऑप्शंस पर भी टैक्स बढ़ाया गया है। ऑप्शन पर एसटीटी की दर 0.1 प्रतिशत से बढ़कर 0.15 प्रतिशत कर दी गई है। इस फैसले का असर सीधे बाजार पर नजर आया है। बजट के बाद बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है, इंडेक्स फ्यूचर और ऑप्शन पर एसटीटी बढ़ने से डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। जब लेनदेन की लागत बढ़ती है तो ट्रेडिंग वॉल्यूम पर इसका सीधा असर पड़ता है। इसी आशंका के चलते निवेशकों ने सबसे पहले एक्सचेंज और ब्रोकिंग कंपनियों के शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे इन सेक्टरों में दबाव देखने को मिला है। वित्त मंत्री का यह फैसला एक्सचेंज कंपनियों के लिए नकारात्मक माना जा रहा है। बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के लिए यह नकारात्मक माना जा रहा है। क्योंकि इन दोनों एक्सचेंज की कमाई सीधे ट्रेडिंग वॉल्यूम पर निर्भर करती है, इसलिए एसटीटी बढ़ने से इन पर असर पड़ने की आशंका है। इस घोषणा के बाद कई बड़ी वेल्थ मैनेजमेंट और ब्रोकिंग कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट आई। एसटीटी बढ़ने से एफएंडओ सेगमेंट की की एक्टिविटी पर असर पड़ सकता है। अगर वॉल्यूम घटता है, तो एक्सचेंज और ब्रोकर की कमाई भी घटेगी। यही चिंता आज बाजार में दिखी तेज बिकवाली की बड़ी वजह मानी जा रही है।