टैक्सपेयर्स के लिए बजट में क्या बदला? जाने पूरा गणित

 टैक्सपेयर्स के लिए बजट में क्या बदला? जाने पूरा गणित
नई दिल्ली। बजट का सबसे बड़ा ऐलान इनकम टैक्स एक्ट से जुड़ा है। मौजूदा इनकम टैक्स कानून को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा
वित्तमंत्री ने बजट 2026 का बजट पेश किया है। जिसमें आम आदमी की जेब पर असर डालने वाले कई बदलाव किए गए हैं। ये बदलाव खासतौर पर शेयर बाजार की ट्रेडिंग, विदेशी संपत्ति, रेमिटेंस और टैक्स रिटर्न फाइलिंग से जुड़े हैं। बजट में कोई नई छूट या इनसेंटिव नहीं दिए गए, बल्कि पुराने कानूनों को फिर से दोहराया गया है। ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाए हैं। कंप्लायंस की टाइमलाइन में ढील दी गई है। कई नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएंगे। जो अगले साल के असेसमेंट और मौजूदा फाइनेंशियल प्लानिंग पर सीधा असर डालेंगे। ये कदम सरकार की तरफ से टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी और आसान बनाने की कोशिश लगते हैं, लेकिन कुछ सेक्टरों में लागत बढ़ सकती है।
बजट में फाइनेंशियल एसेट्स और कैपिटल मार्केट से जुड़े लोगों पर फोकस है। पहले जहां शेयर खरीद-बिक्री पर टैक्स कम था, अब वहां बढ़ोतरी की गई है। साथ ही, विदेशी रेमिटेंस पर टीसीएस कम किया गया है, जो उन परिवारों के लिए अच्छी खबर है जो बच्चों को पढ़ाई या इलाज के लिए पैसा भेजते हैं। एक बार की विदेशी संपत्ति डिसक्लोजर स्कीम भी लाई गई है, जो पुरानी गलतियों को सुधारने का मौका देती है। कुल मिलाकर, यह बजट नियमों को सख्ती से लागू करने के साथ-साथ प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ध्यान देता है, ताकि आम टैक्सपेयर आसानी से नियम मान सकें और उन्हें बेवजह की परेशानी न हो।
सबसे बड़ा ऐलान इनकम टैक्स एक्ट से जुड़ा
बजट का सबसे बड़ा ऐलान इनकम टैक्स एक्ट से जुड़ा है। मौजूदा इनकम टैक्स कानून को पूरी तरह बदल दिया जाएगा। नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा। सरकार ने कहा है कि पुराने कानून की रिव्यू पूरी हो चुकी है, और नया नियम आसान नियम और नए फॉर्म्स के साथ आएगा। इसका मकसद ये है कि आम नागरिक बिना मुश्किल के टैक्स कंप्लाय कर सकें। पहले जहां कानून में छोटे-मोटे बदलाव होते थे, अब पूरा नया स्टैच्यूट आएगा। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे सिस्टम ज्यादा क्लियर हो सकता है, लेकिन ट्रांजिशन पीरियड में कुछ कन्फ्यूजन भी हो सकता है।
कंप्लायंस को आसान बनाने के लिए फॉर्म 15G और 15H की सबमिशन में बदलाव किया गया है। ये फॉर्म्स इंटरेस्ट इनकम पर TDS रोकने के लिए इस्तेमाल होते हैं, जब कोई व्यक्ति एलिजिबल होता है। अब डिपॉजिटरीज को इन फॉर्म्स को एक्सेप्ट करने और कंपनियों को डायरेक्ट प्रोवाइड करने की परमिशन मिलेगी। यानी इनवेस्टर्स को हर कंपनी को अलग-अलग फॉर्म नहीं भेजने पड़ेंगे। ये बदलाव सीनियर सिटिजंस और लो-इनकम वाले लोगों के लिए फायदेमंद होगा।