चार साल में गांवों तक पाइप से पहुंचेगी रसोई गैस, 11 राज्य प्राथमिकता में

 चार साल में गांवों तक पाइप से पहुंचेगी रसोई गैस, 11 राज्य प्राथमिकता में

Nimmi Thakur

गोवा -देश के दस हजार से अधिक आबादी वाले गांवों में अगले चार वर्षों के भीतर पाइपलाइन के जरिए रसोई गैस की आपूर्ति शुरू होने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित 11 राज्यों को प्राथमिकता में रखा गया है। इन राज्यों में देश की कुल आबादी का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा निवास करता है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस की निर्बाध, सुरक्षित और स्थायी आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
इंडिया एनर्जी वीक 2026 के दौरान इस विषय पर तेल और गैस क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार प्रधानमंत्री का स्पष्ट विजन है कि शहरों के साथ-साथ गांवों तक भी पीएनजी यानी पाइप्ड नेचुरल गैस पहुंचे। इसी दिशा में विभिन्न कंपनियां काम कर रही हैं और पाइप्ड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड की देखरेख में यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। गांवों में गैस आपूर्ति चरणबद्ध तरीके से की जाएगी ताकि कम से कम समय में अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
इस योजना के तहत पंजाब, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, त्रिपुरा, तमिलनाडु, पुदुचेरी, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान में काम तेज किया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक इन राज्यों को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़ी स्पष्ट नीति पहले से मौजूद है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों तक पाइप से गैस पहुंचाने के लिए अलग से किसी नई नीति की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही इन राज्यों में देश की आधी से अधिक आबादी रहती है, इसलिए इन्हें पहले चरण में शामिल किया गया है।
गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों का कहना है कि यह धारणा भ्रामक है कि गांवों में गैस पाइपलाइन बिछाने की लागत बहुत ज्यादा होगी या आपूर्ति के लिए अलग से बड़े ढांचे की जरूरत पड़ेगी। दरअसल पीएनजी वही प्राकृतिक गैस है जिसे वाहनों के लिए सीएनजी कहा जाता है। घरेलू रसोई के लिए इसे पीएनजी, उद्योगों के लिए आईपीएनजी और व्यावसायिक संस्थानों के लिए सीपीएनजी कहा जाता है। जिन इलाकों में पहले से सीएनजी स्टेशन मौजूद हैं, वहां से आसपास की बस्तियों तक पाइपलाइन के जरिए पीएनजी पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान है।
इंडिया एनर्जी वीक 2026 में ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने एक अहम लेकिन चिंताजनक पहलू पर भी चर्चा की। इसमें बताया गया कि आने वाले समय में ऊर्जा की खपत का बड़ा हिस्सा उत्पादन के बजाय मशीनों और सिस्टम को ठंडा करने में लगेगा। खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर्स के बढ़ते उपयोग के कारण कूलिंग की जरूरत तेजी से बढ़ेगी। सीधे शब्दों में कहें तो किसी मशीन को चलाने में जितनी ऊर्जा लगेगी, उसे ठंडा रखने में उससे भी अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
यूएई के उद्योग और उन्नत प्रौद्योगिकी मंत्री तथा एडीएनओसी के प्रबंध निदेशक और सीईओ डॉ. सुल्तान अल जाबेर ने कहा कि वर्ष 2040 तक वैश्विक तेल की मांग 100 मिलियन बैरल प्रतिदिन से ऊपर बनी रहेगी। इसके साथ ही एलएनजी और बिजली की मांग में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि बिजली की बढ़ती मांग केवल एआई या डेटा सेंटर्स की वजह से नहीं, बल्कि कूलिंग आवश्यकताओं के तेजी से बढ़ने के कारण भी होगी। उनका अनुमान है कि 2050 तक दुनिया भर में एयर कंडीशनरों की संख्या 5.6 अरब तक पहुंच जाएगी, यानी आने वाले तीन दशकों में हर सेकेंड लगभग 10 एसी बिकेंगे।