भारत और यूरोपीय संघ के बीच आज ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता पर मुहर
नई दिल्ली। आज मंगलवार को भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लग गई है। इस ऐतिहासिक डील से देश के कई राज्यों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते के तहत लगभग 6.4 लाख करोड़ रुपये के निर्यात को 27 यूरोपीय देशों के बाजारों तक एकीकृत व्यापार ढांचे के तहत पहुंच मिलेगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पीयूष गोयल ने बताया कि गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम और केरल जैसे राज्य इस समझौते के प्रमुख लाभार्थी हो सकते हैं।
वहीं पीएम मोदी ने कहा कि यह एफटीए भारत और यूरोपीय संघ की कई प्राथमिकताओं के अनुरूप है और इससे व्यापार, तकनीक और निवेश को नई गति मिलेगी। उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापार, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियारकरण हो रहा है, ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ को आपसी निर्भरता को कम करने और विश्वसनीय सप्लाई चेन विकसित करने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, चिप्स और फार्मा कच्चे माल जैसे क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता घटाने पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने रक्षा उद्योग और उन्नत तकनीकों में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने रक्षा, अंतरिक्ष, दूरसंचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने की बात कही।
पीएम मोदी ने स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य को साझा प्राथमिकता बताते हुए हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शोध और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, टिकाऊ परिवहन, जल प्रबंधन, सर्कुलर इकॉनमी और टिकाऊ कृषि जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग विकसित करने की जरूरत बताई।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने शिखर सम्मेलन की संयुक्त अध्यक्षता की। इस दौरान सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठकें हुईं, जिनमें व्यापार, तकनीक, रक्षा, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। शिखर सम्मेलन से पहले कई अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किए गए। इनमें भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के निष्कर्ष की संयुक्त घोषणा, सुरक्षा व रक्षा साझेदारी समझौता और मोबिलिटी सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-ईयू बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। भारत मंडपम में आयोजित इस मंच पर भारत और यूरोप के 100 से अधिक शीर्ष उद्योगपतियों और सीईओ ने भाग लिया, जहां निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सहयोग पर चर्चा हुई।
विदेश सचिव के अनुसार, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत के राजकीय दौरे पर आए हैं। दोनों नेता गणतंत्र दिवस समारोह में संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि रहे। यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं को भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनने का अवसर मिला। इस यात्रा के दौरान यूरोपीय संघ की विदेश नीति एवं सुरक्षा मामलों की उच्च प्रतिनिधि और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कालास सहित आयोग और परिषद के वरिष्ठ अधिकारी भी भारत पहुंचे हैं।
वहीं पीएम मोदी ने कहा कि यह एफटीए भारत और यूरोपीय संघ की कई प्राथमिकताओं के अनुरूप है और इससे व्यापार, तकनीक और निवेश को नई गति मिलेगी। उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापार, तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों का हथियारकरण हो रहा है, ऐसे में भारत और यूरोपीय संघ को आपसी निर्भरता को कम करने और विश्वसनीय सप्लाई चेन विकसित करने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, चिप्स और फार्मा कच्चे माल जैसे क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता घटाने पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने रक्षा उद्योग और उन्नत तकनीकों में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने रक्षा, अंतरिक्ष, दूरसंचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्रों में साझेदारी मजबूत करने की बात कही।
पीएम मोदी ने स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य को साझा प्राथमिकता बताते हुए हरित हाइड्रोजन, सौर ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शोध और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर, टिकाऊ परिवहन, जल प्रबंधन, सर्कुलर इकॉनमी और टिकाऊ कृषि जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग विकसित करने की जरूरत बताई।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने शिखर सम्मेलन की संयुक्त अध्यक्षता की। इस दौरान सीमित और प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठकें हुईं, जिनमें व्यापार, तकनीक, रक्षा, रणनीतिक सहयोग और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। शिखर सम्मेलन से पहले कई अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किए गए। इनमें भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के निष्कर्ष की संयुक्त घोषणा, सुरक्षा व रक्षा साझेदारी समझौता और मोबिलिटी सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भारत-ईयू बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। भारत मंडपम में आयोजित इस मंच पर भारत और यूरोप के 100 से अधिक शीर्ष उद्योगपतियों और सीईओ ने भाग लिया, जहां निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सहयोग पर चर्चा हुई।
विदेश सचिव के अनुसार, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर भारत के राजकीय दौरे पर आए हैं। दोनों नेता गणतंत्र दिवस समारोह में संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि रहे। यह पहली बार है जब यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं को भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनने का अवसर मिला। इस यात्रा के दौरान यूरोपीय संघ की विदेश नीति एवं सुरक्षा मामलों की उच्च प्रतिनिधि और यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कालास सहित आयोग और परिषद के वरिष्ठ अधिकारी भी भारत पहुंचे हैं।
