पैरालिंपिक चैंपियन प्रवीण कुमार को मिला पद्म श्री सम्मान
नई दिल्ली। पैरालंपिक में स्वर्ण पदक और रजत पदक समेत कई अन्य विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन करने वाले जेवर के गोविंदगढ़ निवासी प्रवीण कुमार को उनकी कड़ी मेहनत और जुनून ने खेलों के शिखर तक पहुंचाया है। गांव में जहां खेल के मैदान और सुविधाओं के अभाव के बीच अपने को निखार कर इस मुकाम तक पहुंचे हैं कि देश उनको पद्म श्री से सम्मानित कर रहा है।
जेवर से 6 किलोमीटर दूर यमुना के खादर स्थित गोविंद गढ़ गांव में पद्म श्री के लिए चयनित होने की खबर पर घर में मौजूद उनके पिता अमरपाल सिंह, मां निर्दोष, भाई सचिन समेत पूरे परिवार में हर्ष का माहौल था। परिजन और ग्रामीण एक-दूसरे का मुंह मीठा करा रहे थे। वहीं, प्रवीण के घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ था।
प्रवीण के पिता अमरपाल सिंह ने बताया कि बचपन से वह अपने मित्रों और सहपाठियों के साथ मिलकर वॉलीबॉल खेलते थे। उनकी टीम आसपास के गांवों में भी खेलने जाती थी। प्रवीण गांव की टीम में थे वह ऊंची छलांग लगाकर वॉलीबाल का तेज शॉट लगाता, एक माह बाद से उनके बेटे के एक पैर में दिक्कत दिखने लगी थी। प्रवीण की मां निर्दोष देवी ने बताया कि बड़े होने के बाद प्रवीण घर में कूदता-फांदता रहता था। सातवीं कक्षा के बाद उछलकर घर की छत को भी छू लेता था। उन्होंने बताया कि बचपन में ज्यादा कूद फांद करने पर वह खूब डांटती थीं।
