2025 रहा सबसे गर्म साल, दुनिया का बढ़ रहा तापमान, ध्रुवीय इलाकों में बढ़ी गर्मी
- दिल्ली राष्ट्रीय
Political Trust
- January 22, 2026
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नई दिल्ली। 2025 अब तक का सबसे गर्म साल रहा है। दुनिया के आधे से अधिक क्षेत्र में सामान्य से अधिक तेज हीट स्ट्रेस (32 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक महसूस होने वाला तापमान) रहा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हीट स्ट्रेस मौतों का प्रमुख कारण है। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के हिस्सों में भीषण जंगलों की आग से वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिम बढ़े।
वैश्विक तापमान को लेकर चेतावनी और गंभीर गई है। साल 2025 रिकॉर्ड में तीसरा सबसे गर्म साल रहा। यह 2023 से महज 0.01 डिग्री सेल्सियस ठंडा और 2024 (अब तक का सबसे गर्म साल) से 0.13 डिग्री कम रहा। चौंकाने वाली बात यह है कि 2015 से 2025 के बीच के 11 साल ही अब तक के 11 सबसे गर्म साल साबित हुए हैं।
यूरोपीय जलवायु निगरानी कार्यक्रम कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, बीते तीन वर्षों में लगभग हर महीना अब तक के सबसे गर्म महीनों में शामिल रहा। 2025 में दुनिया के करीब आधे हिस्से में साल भर तापमान सामान्य से कहीं अधिक रहा, जिसके चलते यहां औसत से ज्यादा हीट स्ट्रेस दर्ज किया गया। खास बात यह रही कि एल-नीनो जैसी स्थितियां न होने के बावजूद समुद्र की सतह का तापमान ऐतिहासिक रूप से ऊंचा बना रहा।
ध्रुवीय इलाकों में असामान्य गर्मी ने वैश्विक औसत तापमान को और ऊपर खींच दिया। कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के निदेशक कार्लो बुओनटेम्पो ने चेताया कि 1.5 डिग्री की सीमा पार होना तय है, सवाल यह है कि दुनिया इसके असर को कैसे संभालती है। साल 2025 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि जलवायु परिवर्तन भविष्य नहीं, आज की हकीकत है। उत्सर्जन में तेज कटौती और अनुकूलन के ठोस कदम ही बढ़ते जोखिमों से बचाव का रास्ता हैं।
यूरोपीय जलवायु निगरानी कार्यक्रम कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, बीते तीन वर्षों में लगभग हर महीना अब तक के सबसे गर्म महीनों में शामिल रहा। 2025 में दुनिया के करीब आधे हिस्से में साल भर तापमान सामान्य से कहीं अधिक रहा, जिसके चलते यहां औसत से ज्यादा हीट स्ट्रेस दर्ज किया गया। खास बात यह रही कि एल-नीनो जैसी स्थितियां न होने के बावजूद समुद्र की सतह का तापमान ऐतिहासिक रूप से ऊंचा बना रहा।
ध्रुवीय इलाकों में असामान्य गर्मी ने वैश्विक औसत तापमान को और ऊपर खींच दिया। कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस के निदेशक कार्लो बुओनटेम्पो ने चेताया कि 1.5 डिग्री की सीमा पार होना तय है, सवाल यह है कि दुनिया इसके असर को कैसे संभालती है। साल 2025 के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि जलवायु परिवर्तन भविष्य नहीं, आज की हकीकत है। उत्सर्जन में तेज कटौती और अनुकूलन के ठोस कदम ही बढ़ते जोखिमों से बचाव का रास्ता हैं।
